उत्तराखंड

गढवाली साहित्य के शिल्पकार डॉ उमेश चमोला को अंतरराष्ट्रीय गढ़वाल महासभा ने किया सम्मानित

 

ऋषिकेश,21 जनवरी। विख्यात रूसी विद्वान लेखक लियो टॉलस्टॉय की कहानियां का गढ़वाली भाषा में अनुवाद कर विश्वपटल पर गढ संस्कृति के प्रचार प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले  डॉ उमेश चमोला को अंतरराष्ट्रीय गढ़वाल महासभा ने किया सम्मानित।

गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय गढ़वाल महासभा के देहरादून रोड स्थित कार्यालय में हिंदी एवं गढ़वाली के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ उमेश चमोला द्वारा रूसी भाषा के प्रसिद्ध लेखक लियो टॉलस्टाय की सोलह कहानियों का गढ़वाली भाषा में अनुवाद *छै फूटै जमीन* कर उनका प्रकाशन कराने पर  महासभा अध्यक्ष डॉ राजे सिंह नेगी ने उन्हें सम्मानित किया। डॉ नेगी ने बताया कि इससे पूर्व डॉ चमोला के गढ़वाली में दो उपन्यास,एक खण्ड काव्य,एक गीत कविता संग्रह, एक व्यंग्य संग्रह ओर बाल नाटिका संग्रह सहित अब तक कुल 18 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है। साहित्यिकार डॉ उमेश चमोला ने इस मौके पर बताया कि टॉलस्टाय की कहानियों के माध्यम से उन्होंने गढ़वाली साहित्य को नया शिल्प एवं नई कथा शेली देने का प्रयास किया है।अंग्रेजी के वाक्यांसो का शुद्ध गढ़वाली के कहावतों ओर मुहावरों के रूप में प्रयोग किया गया है जो गढ़वाली की शब्द संपदा को भी सिद्ध करती है।पुस्तक की सारी कहानियां बच्चो के नैतिक विकास में उपयोगी साबित होंगी।

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