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योग महोत्सव के दूसरे दिन योगाचार्यों ने योग साधकों को कराया विभिन्न क्रियाओं का अभ्यास

 

ऋषिकेश 02 मार्च। गढ़वाल मंडल विकास निगम एवं पर्यटन विभाग के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव के दूसरे दिन गंगा रिजॉर्ट में योगाचार्यों ने योग साधकों को विभिन्न क्रियाओं का अभ्यास कराया।
मंगलवार मुख्य पांडाल में सुबह के सत्र में ग्रैंड मास्टर अक्षर ने योग एवं प्राणायाम का अभ्यास कराया। उन्होंने धनुर आसान के विषय में बताते हुए कहा कि यह एक बहुत लाभदायक आसान है। इसके अभ्यास करने से शरीर शक्तिशाली होने के साथ-साथ लचीला हो जाता है। उन्होंने दंडासन, नौकासन व हिमालय प्रणाम का अभ्यास कराया। बताया कि हिमालय प्रणाम आसन का अभ्यास करने से शरीर में ऊर्जा का संचार होता है एवं प्रसन्नता के भाव आते हैं। कहा कि प्राणायाम से हम अपने मन को शांत करते हैं एवं जितने भी मेंटल डिसऑर्डर हैं उनको प्राणायाम से दूर किया जा सकता है और शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है।
दूसरी तरफ पंचकर्मा हॉल में योगाचार्य कपिल संघवी ने सुबह के सत्र का प्रारंभ प्राणायाम से करते हुए कहा कि प्राणवायु द्वारा प्राण की पुष्टि होती है। जितना गहरा और दीर्घ सांस लेते एवं छोड़ते हैं उतना ही अधिक मन शांत रहता है और अधिक ऊर्जा का उत्पादन होता है। उन्होंने कहा कि यह शरीर पंच तत्वों से मिलकर बना है। जिसमें पृथ्वी तत्व हमें भोजन से प्राप्त होता है, जल तत्व मां गंगा से प्राप्त होता एवं अग्नि सूर्य से प्राप्त होती है। जबकि आकाश तत्व खुले आकाश से प्राप्त होता है। प्राण वायु को हम भली भांति से अवशोषित करेंगे तो हम उतने ही स्वस्थ और ऊर्जावान बने रहेंगे।
दोपहर के सत्र में मुख्य पंडाल में आर्ट ऑफ लिविंग के श्री श्री रविशंकर ने ऑनलाइन माध्यम से योग साधकों को संबोधित करते हुए कहा कि आर्ट ऑफ लिविंग जीवन जीने की कला का एक सिद्धांत है। उन्होंने कहा कि योगा मेडिटेशन से व्यक्ति में ग्रहण करने की शक्ति का विकास होता है। उन्होंने कहा कि मन पर जोर जबरदस्ती नहीं करनी चाहिए। मन को ढीला ढाला छोड़ना चाहिए। इससे धारणा बनती है व धारणा से ध्यान व ध्यान से समाधि की ओर जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मन की एकाग्रता से विकृतियां दूर होती हैं और विकृतियां दूर होने से व्यक्ति का चरित्र सकारात्मक रूप से बदल जाता है। उन्होंने कहा कि हर अपराधी के भीतर कोई पीड़ित व्यक्ति मदद के लिए पुकार रहा होता है। दोपहर बाद मुख्य पंडाल में गौर गोपाल दास ने प्रतिभागियों को ऑनलाइन संबोधित कर योग के महत्व के बारे में बताया।
वही गंगा रिसोर्ट में विभिन्न विभागों द्वारा अपने उत्पादन के स्टाल लगाए गए हैं। जिसमें उद्योग विभाग, आयुष विभाग प्रमुख रूप से शामिल हैं। आध्यात्मिक विभाग व सत्संग केंद्र जोधपुर द्वारा सिद्धि योग के माध्यम से प्रतिभागियों व आगंतुकों को ध्यान लगाने के क्रिया का अभ्यास कराया गया। गढ़वाल मंडल विकास निगम द्वारा गढ़वाली व्यंजनों का स्टॉल लगाया गया है। इसमें बुरांश चाट, कूलथ अनार सोरबा, गहत चाट, राजमा गलावटी कबाब, मंडवा समोसा चाट, बुरांश पकौड़ी, ब्राउन राइस पुडिंग, देहरादूनी पुडिंग परोसे जा रहे हैं। योग महोत्सव के दूसरे दिन सांय कालीन सत्र में पंडित रजनीश रितेश मिश्रा ने मुख्य पंडाल में सांस्कृतिक कार्य के माध्यम से शानदार प्रस्तुति दी।

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