सियासी हलचल

सत्ता का तमगा उतरने का नाम नहीं ले रहा, शासनादेश जारी होने के बावजूद दर्जाधारी राज्यमंत्री अब भी ताने हुए हैं रसूख

 

ऋषिकेश, 03 अप्रैल। पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत कार्यकाल में रेवड़ी की तरह बांटे गए राज्य मंत्रियों के पर कतर दिए गए हैं। मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने बर्खास्तगी के शासनादेश भी जारी कर दिए गए हैं। इसके बावजूद ऋषिकेश के दर्जाधारी राज्यमंत्री पद का मोह नहीं छोड़ पा रहे हैं। यही वजह है कि बर्खास्तगी के बावजूद नामधारी मंत्री गाड़ियों और बोर्ड से अपने नाम नहीं हटवा रहे हैं। जमीनी हकीकत टटोलने के दौरान दिलचस्प सच्चाई देखने को मिली। सुरेंद्र मोघा से लेकर कृष्ण कुमार सिंघल तक गाड़ी से लेकर कैम्प कार्यालय और घरों तक पदों के चमचमाते बोर्ड कायम हैं।  हैरानी की बात ये है कि अधिकारियों को ये खुला उल्लंघन नहीं दिख रहा। देखने वाली बात होगी कि इन पूर्व दर्जाधारी मंत्रियों को अपनी हकीकत कब महसूस होती है। खास बात ये है कि पूरे उत्तराखंड में सबसे ज्यादा तीन दर्जाधारी मंत्री ऋषिकेश से ही बनाये गए थे।

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जिनपर भूमाफिया का ठप्पा उन्हीं को बना दिया था दर्जाधारी मंत्री
ऋषिकेश। त्रिवेंद्र कार्यकाल में खैरात की तरह बांटे गए पदों ने खुद में सवाल पैदा कर दिया था। भाजपा कार्यकर्ताओं से लेकर आम लोगों में भी इस बंदरबांट की चर्चा रही, लेकिन खुलकर कोई बोल नहीं पाया। अब लोग संतोष की सांस ले रहे हैं। हद तो तब हो गई जब एक भूमाफिया की छवि वाले पिछड़े समाज के एक नेता को भी दर्जा राज्यमंत्री बना दिया गया। मजे की बात तो ये कि जिस स्वम्भू नेता ने तमाम लोगों को लोन के नाम पर शोषण, सरकारी भूमि पर कब्जे का कारनामा किया था उसे ही त्रिवेंद्र ने असीम उदारता में समाज कल्याण विभाग की जिम्मेदारी सौंप दी। आज भी पूर्व दर्जाधारी मंत्री का वीरभद्र क्षेत्र में वन विभाग की भूमि पर अवैध रिजॉर्ट चल रहा है। इसके अलावा गुज्जर बस्ती का भी प्लाट बड़े पैमाने पर हड़पकर बेंच देने में आया था। फिलहाल रिजॉर्ट से लेकर गुज्जर बस्ती प्लाट घोटाले की फाइलें दबी पड़ी हैं।

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