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स्वास्थ्य मंत्रालय की नई गाइडलाइंस, होम आइसोलेशन रह रहे मरीज कैसे रखें अपना ध्यान

 

नई दिल्ली, 30 अप्रैल। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने उन मरीजों को लिए संशोधित गाइडलाइन जारी की है, जिनको कोरोना के लक्षण नहीं हैं या हल्के लक्षण हैं और वो होम आइसोलेशन में है। इससे पहले बीते साल होम आइसोलेशन में रहे रहे मरीजों के लिए दिशानिर्देश जारी किए थे। जिनमें अब संशोधन किया गया है। दिशानिर्देश में कहा गया है कि लक्षण नहीं होने के साथ-साथ मरीज में ऑक्सिजन सैचुरेशन 94 फीसदी से अधिक होना चाहिए जबकि मामूली लक्षण वाले रोगियों को सांस लेने में दिक्कत नहीं होनी चाहिए।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपनी गाइडलाइंस में कहा है कि होम आइसोलेशन में रह रहे मरीजों को रेमडेसिविर इंजेक्शन नहीं लेने की सलाह दी गई है। ये केवल अस्पताल में ही लगाया जाना चाहिए। वहीं मामूली लक्षण में स्टेरॉयड नहीं दिया जाना चाहिए और 7 दिनों के बाद भी अगर लक्षण बने रहते हैं तो उपचार करने वाले डॉक्टर से विचार-विमर्श कर कम डोज का ओरल स्टेरॉयड लेना चाहिए।

गाइडलाइंस में 60 वर्ष से अधिक उम्र के रोगी या हाइपरटेंशन, मधुमेह, हृदय रोग, फेफड़ा या लीवर या गुर्दे जैसी बीमारियों से पीड़ित लोगों को चिकित्सक के परामर्श से ही होम आइसोलेशन में रहना चाहिए। ऑक्सिजन सैचुरेशन लेवल में कमी या सांस लेने में दिक्कत आने पर डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।

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संशोधित दिशानिर्देश के मुताबिक रोगी गर्म पानी का कुल्ला कर सकता है या दिन में दो बार भाप ले सकता है। अगर बुखार पैरासीटामोल 650 एमजी दिन में चार बार लेने से नियंत्रण में नहीं आता है तो चिकित्सक से परामर्श लें, जो अन्य दवाएं जैसे दिन में दो बार नैप्रोक्सेन 250 एमजी ले सकता है।

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