उत्तराखंडस्वास्थ्य

*पर्यावरणविद् सुंदर लाल बहुगुणा का अवसान एक अकादमिक विरासत का अंत- डॉ.विजय धस्माना*

 

डोईवाला, 21 मई। पर्यावरणविद् पद्म विभूषण सुन्दरलाल बहुगुणा जी का अवसान विश्व के लिए अपूर्णीय क्षति है। पर्यावरण संरक्षण व सामाज सेवा के लिए उनके योगदान हेतु साल 2003 में हिमालयन इंस्टिट्यूट हॉस्पिटल ट्रस्ट (एचआईएचटी) ने उन्हें स्वामी राम मानवता पुरस्कार से अलंकृत किया किया।
स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ.विजय धस्माना ने पर्यावरणविद् पद्म विभूषण सुन्दरलाल बहुगुणा जी के निधन पर गहरा दुख जताया। ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति व परिजनों को दुःख सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की।

कुलपति डॉ.विजय धस्माना ने कहा कि सुंदर लाल बहुगुणा के जाने से एक काल खंड चला गया है। वो एक ऐसे समाज सेवक थे, जिन्होंने देश की आजादी से पहले और देश की आजादी के बाद भी समाज हित में अपना पूरा जीवन अर्पण कर दिया।

कुलपति डॉ.विजय धस्माना ने कहा कि 13 नवंबर 2003 का वो गौरवमयी व यादगार दिन था जब स्व.संदुर लाल बहुगुणा जी को एचआईएचटी संस्थापक डॉ.स्वामी राम के नाम से स्थापित स्वामी राम मानवता पुरस्कार प्रदान किया गया था। एचआईएचटी की ओर से हर वर्ष दिए जाने वाला स्वामी राम मानवता पुरस्कार से अंलकृत होने वाले वह पहली शख्सियत हैं।

कुलपति डॉ.विजय धस्माना ने कहा कि कोरोना संकट को भी एक तरह से प्रकृति से छेड़छाड़ का ही नतीजा माना जा रहा है। ऐसे में इस संकट की घड़ी में प्रकृति के संरक्षक का चला जाना महान व्यक्तित्व का अवसान है। पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उनके योगदान को राष्ट्र कभी नहीं भुला पाएगा।

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