उत्तराखंडकोविड-19

महिलाओं में माहवारी सम्बंधी दिक्कतें पैदा कर रही कोरोना महामारी: डाॅ0 सुजाता संजय

👉मासिक धर्म कोई अपराध नही खुल कर करें बात: डाॅ0 सुजाता संजय

*👉लॉकडाउन की वजह से विश्व स्तर पर महिलाओं की मेंस्ट्रल हाइजीन प्रभावित: डाॅ0 सुजाता संजय
पीरियड्स के बारे में जागरूकता लड़कों एवं पु़रुषों की समान भागीदारी के बिना अधूरी*: डाॅ. सुजाता संजय

देहरादून, 27 मई । पूरी दुनिया बेहद संक्रामक कोविड-19 वायरस के खतरे से जूझ रही है। इससे बचने के लिए साफ-सफाई और सोशल डिस्टेंसिंग अपनाना ही बेस्ट है। पर्सनल हाइजीन को बनाए रखने के लिए बार-बार हाथों को साबुन से धोने की सलाह दी जाती है। घर के अंदर रहने के अलावा संतुलित आहार और व्यायाम करने की सलाह दी जा रही है। इससे शरीर को बीमारियों से लड़ने में आसानी होगी, लेकिन पीरियड्स के दौरान महिलाओं को अपने स्वास्थ्य पर और भी ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। भारत में लगभग 335 मिलियन मासिक धर्म वाली महिलाएं और लड़कियां हैं, जो विभिन्न सामाजिक और आर्थिक कारकों के कारण प्रभावी मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन (एमएचएम) के लिए बहुस्तरीय बाधाओं का सामना करती हैं। स्वस्थ मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार देश के केवल 12 प्रतिशत महिलाएं और लड़कियां ही सैनेटरी नैपकिन का उपयोग करती हैं, जबकि अधिकांश महिलाएं कपड़े आदि का ही उपयोग करती हैं।

संजय आँर्थोपीडिक स्पाइन एण्ड मैटरनिटी सेंटर जाखन देहरादून उत्तराखण्ड की प्रसूति एंव स्त्री रोग विश्ेाषज्ञ राष्ट्रपति द्वारा पुरस्कृत डाॅ0 सुजाता संजय नें बताया कि महावारी के दौरान महिलाओं में बीमारियों से लड़ने की शक्ति कम हो जाती है। ऐसे में उनमें इंफेक्शन की सम्भावना भी बढ़ जाती है। इसलिए, कोविड-19 में मासिक धर्म स्वच्छता के साथ स्वास्थ्य और पोषण पर ध्यान दें। अक्सर महिलाएं परिवार की देखभाल के चक्कर में खुद की देखभाल करना भूल जाती हैं।मासिक धर्म कोई अपराध नहीं बल्कि एक सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है। जिस पर घर और समाज में खुलकर बात की जाए तो इस दैरान स्वच्छता के महत्व को भी समझा जा सकता है। जिसके लिए हमें एक माहौल बनाना होगा और पुरानी परंपरागत सोच को बदलना होगा। यह स्वच्छता महिलाओं को रखेगी स्वस्थ और देगी विश्वास आगे बढनें का, कभी नहीं रुकनें का, और डर को जड़ से खत्म कर देने का।

डाॅ0 सुजाता संजय नें बताया कि 28 मई को पूरी दुनिया में मासिक धर्म स्वच्छता दिवस मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य था लड़कियों और महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता रखने के लिए जागरूक करना हैं। तारीख 28 इसलिए चुनी गई, क्योंकि आमतौर पर महिलाओं के मासिक धर्म 28 दिनों के भीतर आते हैं।

कोरोना वायरस की वजह से पूरे देश में लॉकडाउन है. इस संकट ने विश्व स्तर पर महिलाओं की मेंस्ट्रल हाइजीन और स्वास्थ्य को प्रभावित किया है. कई जगहों पर तो लॉकडाउन के चलते इनसे जुड़े उत्पादों की आपूर्ति तक नहीं हो पा रही है, और महिलाएं लगातार इससे होने वाले संक्रमण का शिकार हो रही हैं. दुनियाभर में कोरोना वायरस महामारी के दौरान यह संभव है कि लोग पहले से कहीं ज्यादा तनाव महसूस कर रहे हैं। भले ही उन्हें इस बात का एहसास न हो। यह लगातार होने वाला तनाव शरीर में अजीब तरह की समस्या पैदा कर सकता है। जो महिलाएं क्वारन्टीन हैं या फिर कोरोना वायरस की जांच में पॉजिटीव पाए जाने की वजह से अस्पताल में हैं उनको मेंस्ट्रल हाइजीन बनाए रखने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है. इसलिए वहां व्यवस्था संभाल रहे मैनेजर्स को पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करनी चाहिए और कर्मचारियों को प्रशिक्षित करना चाहिए ताकि वे उन्हें सुविधा प्रदान कर सकें. गरीब वर्ग की महिलाएं जिन्हें मेंस्ट्रल हाइजीन से जुड़ी वस्तुओं की आपूर्ति और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने में बाधाओं का सामना करना पड़ता है. लॉकडाउन की वजह से स्टोर और परिवहन सुविधाओं के बंद होने के बाद उनकी परेशनाी और भी ज्यादा बढ़ गई है।

डाॅ0 सुजाता संजय नें बताया कि महिलाओं के लिए तो यह महामारी और भी चिंता पैदा करती है, क्योंकि इससे उनके मासिक धर्म का चक्र यानी पीरियड साइकल बिगड़ सकता है। पीरियड्स का कभी-कभी न आना यानी एमेनोरिया तब होता है जब कोई दर्दनाक घटना सामने आती है। तनाव हमारे हार्मोनल मार्ग को सक्रिय करता है जो कोर्टिसोल की रिलीज को बढ़ावा देता है, जिसे स्ट्रेस हार्मोन भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि अधिक तनाव के समय शरीर में कोर्टिसोल का स्तर बढ़ता है। कोर्टिसोल का ज्यादा रिलीज होना प्रजनन हार्मोन के सामान्य स्तर को दबा सकता है। इससे ओवुलेशन और पीरियड्स बंद हो जाते हैं। डिसमेनोरिया भी उच्च तनाव की स्थितियों से जुड़ा है। इसमें पीरियड्स के दौरान गर्भाशय में असहनीय पीड़ा होती है। जो लोग पहले से ही पीरियड का दर्द का अनुभव करते हैं, उनके इस तरह से प्रभावित होने की आशंका अधिक होती है।

डाॅ0 सुजाता का कहना है कि किसी भी स्थिति में तनाव को दूर करने के उपाय ढूंढ लेना चाहिए। इसके लिए कुछ घरेलू उपाय अपना सकते हैं। तुलसी के पत्ते का इस्तेमाल तनाव की स्थिति को कम करने में मदद करेगा। सुबह तुलसी के पत्ते को चबा लें या फिर कुछ पत्तों को गर्म पानी में डालकर ताजा पेय बना लें। तुलसी की चाय पीकर भी यह काम कर सकते हैं। तुलसी के अलावा ग्रीन टी का सेवन भी तनाव से राहत दिलाता है। शहद और नीबू के साथ एक कप ग्रीन टी तनाव से राहत पाने का शानदार तरीका है। अश्वगंधा की जड़ को रोज रात को एक गिलास गर्म दूध में उबाल कर पिएं। इससे नींद भी अच्छी आएगी और तनाव कम करने में भी मदद् मिलेगी।

कोविड-19 में मासिक धर्म स्वच्छता को बनाए रखने के लिए साफ-सुथरे अंडरवियर पहनें। इसके साथ ही याद रखें कि फैब्रिक आरामदायक हो ताकि वजायना तक हवा पहुंचती रहे। अगर आपको पसीना अधिक आता है, तो इनरवियर जल्दी-जल्दी बदलें। कोविड-19 में मासिक धर्म स्वच्छता को बनाए रखने के लिए गन्दगी और इंफेक्शन से बचने के लिए अपनी बेडशीट भी बदलते रहें। आप सैनेटरी पैड्स के अलावा टैम्पोन्स और मेंस्ट्रुअल कप्स का भी इस्तेमाल कर सकती हैं। यदि टैम्पॉन का इस्तेमाल कर रही हैं तो हर दो घंटे के अंदर इसे बदलें। कोविड-19 में मासिक धर्म स्वच्छता के दौरान वही इस्तेमाल करें जिसमें कम्र्फटेबल महसूस करती हैं। आप कॉटन के कपड़े का भी इस्तेमाल कर सकती हैं। बस याद रखें कपड़े को इस्तेमाल करने से पहले डिटॉल से अच्छी तरह से धो लें। साथ ही एक बार इस्तेमाल किए हुए कपड़े को बार-बार धोकर इस्तेमाल करने से बचें। इससे संक्रमण तेजी से फैलता है।

डाॅ0 सुजाता संजय नें बताया कि हल्का-फुल्का शारीरिक और मानसिक व्यायाम करें। योगा, मेडिटशन और हल्के व्यायाम पीरियड्स के दिनों में अच्छे साबित हो सकते हैं। इससे बीमारियों से लड़ने की ताकत बढ़ती है। हालांकि, हैवी एक्सरसाइज करने की मनाही होती है। संतुलित आहार लें। खाने-पीने की आदतों का असर आपके स्वास्थ्य पर पड़ता है। मासिक धर्म के दौरान विटामिन और प्रोटीन से भरपूर आहार का सेवन करें। अपने आहार में फल, अंकुरित अनाज, डेयरी प्रोडक्ट्स और सूखे मेवे शामिल करें। इस समय मांसाहारी आहार न लेना ही बेहतर होगा। आराम करें।घर के काम-काज इस तरह से करें कि आपको थकान न हो। इसके लिए बीच-बीच में ब्रेक लें। लॉकडाउन के दौरान अपने मन और शरीर के स्वास्थ्य पर ध्यान दें। अपने परिवार के सदस्यों में भी पर्सनल हाइजीन को बढ़ावा दें।

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