उत्तराखंडस्वास्थ्य

*13 नवंबर को डॉ.स्वामी राम का 26 वां महासमाधि दिवस*

*-हिमालयन इंस्टिट्यूट जौलीग्रांट परिसर में होगा समारोह, तैयारियां तेज*

*-केंद्रीय रक्षा एवं पर्यटन राज्यमंत्री अजय भट्ट होंगे मुख्य अतिथि*

डोईवाला, 10 नवंबर।  हिमालयन इंस्टिट्यूट हॉस्पिटल ट्रस्ट (एचआईएचटी) के संस्थापक डॉ.स्वामी राम का 26 वां महासमाधि दिवस हर वर्ष की भांति 13 नवंबर को मनाया जाएगा। समारोह को लेकर तैयारियां जारी हैं। केंद्रीय रक्षा एवं पर्यटन राज्यमंत्री अजय भट्ट समारोह के मुख्य अतिथि होंगे।
एचआईएचटी के अध्यक्षीय समिति के सदस्य व स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय (एसआरएचयू) जॉलीग्रांट के कुलपति डॉ.विजय धस्माना ने बताया कि ट्रस्ट के संस्थापक डॉ.स्वामी राम जी का 26 वां महासमाधि दिवस समारोह भव्यता के साथ आयोजित किया जाएगा। समारोह को सफल बनाने के लिए संस्थान में व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। कार्यक्रम में सरकार की ओर से कोरोना गाइडलाइन का पालन भी किया जाएगा।
कुलपति डॉ.विजय धस्माना ने बताया कि केंद्रीय रक्षा एवं पर्यटन राज्यमंत्री अजय भट्ट समारोह के मुख्य अतिथि होंगे। इसी कड़ी में करीब 40 वर्षों से उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में सामाजिक कार्यों को समर्पित संस्था ‘विनोबा सेवा आश्रम’ को स्वामी राम मानवता पुरस्कार-2021 से सम्मानित किया जाएगा। उनको यह सम्मान शिक्षा, स्वास्थ्य स्वावलंबन, गौ सेवा, जैविक खेती सहित ग्राम स्वाराज्य के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान के लिए दिया जा रहा है। उन्हें गोल्ड मेडल, प्रशस्ति पत्र तथा पांच लाख रुपये का नगद पुरस्कार भी प्रदान किया जाएगा।
कुलपति डॉ.विजय धस्माना ने बताया कि समारोह में संस्थान से जुड़े कर्मचारियों को बेस्ट इंप्लवाई अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा। इसके अलावा संस्थान द्वारा होम-स्टे के संचालन के लिए प्रशिक्षित युवाओं को ‘होम-स्टे उद्यमिता विकास प्रशिक्षण’ प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा। इस दौरान एचआईएचटी के वार्षिक कैलेंडर-2022 का विमोचन भी किया जाएगा। इसके बाद दोपहर में भंडारा आयोजित किया जाएगा। समारोह में स्वामी जी के अनुयायी भी शिरकत करेंगे।
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*श्रद्धेय डॉ. स्वामी राम जी का जीवन परिचय*
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*स्वामी राम ने जन सेवा को समर्पित किया था संपूर्ण जीवन*
*-साल 1989 में हिमालयन इंस्टिट्यूट हॉस्पिटल ट्रस्ट (एचआईएचटी) की नींव डाली*
*-13 नवंबर 1996 को स्वामी जी हुए थे ब्रह्मलीन*
डोईवालाः स्वामीराम को लोग एक संत, समाजसेवी, चिकित्सक, फिलोसफर, लेखक के रुप में जानते हैं। लेकिन इन सबसे इतर दुनिया उन्हें मानव सेवा के संदेश वाहक के रुप में भी जाना जाता है।
साल 1925 में पौड़ी जनपद के तोली-मल्ला बदलपुर पौड़ी गढ़वाल में स्वामीराम का जन्म हुआ। किशोरावस्था में ही स्वामीराम ने संन्यास की दीक्षा ली। 13 वर्ष की अल्पायु में ही विभिन्न धार्मिक स्थलों और मठों में हिंदू और बौद्ध धर्म की शिक्षा देना शुरू किया। 24 वर्ष की आयु में वह प्रयाग, वाराणसी और लंदन से उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद कारवीर पीठ के शंकराचार्य पद को सुशोभित किया। गुरू के आदेश पर पश्चिम सभ्यता को योग और ध्यान का  मंत्र देने 1969 में अमेरिका पहुंचे। 1970 में अमेरिका में उन्होंने कुछ ऐसे परीक्षणों में भाग लिया, जिनसे शरीर और मन से संबंधित चिकित्सा विज्ञान के सिद्धांतों को मान्यता मिली। उनके इस शोध को 1973 में इन्साइक्लोपीडिया ब्रिटेनिका ईयर बुक ऑफ साइंस व नेचर साइंस एनुअल और 1974 में वर्ल्ड बुक साइंस एनुअल में प्रकाशित किया गया।
स्वास्थ्य सुविधाओं से महरुम उत्तराखंड में विश्व स्तरीय चिकित्सा संस्थान बनाने का स्वामीराम ने सपना देखा था। उन्होंने अपने सपने को आकार देना शुरू किया 1989 में। इसी साल उन्होंने गढ़वाल हिमालय की घाटी में हिमालयन इंस्टिट्यूट हॉस्पिटल ट्रस्ट की स्थापना की। ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वास्त्य सुविधाओं के पहुंचाने के मकसद से 1990 में रुरल डेवलपमेंट इंस्टिट्यूट (आरडीआई) व 1994 में हिमालयन अस्पताल की स्थापना की। प्रदेश में डॉक्टरों की कमी को महसूस करते हुए स्वामी जी ने 1995 में मेडिकल कॉलेज की स्थापना की। नवंबर 1996 में स्वामी राम ब्रह्मलीन हो गए। इसके बाद स्वामी जी के उद्देश्य व सपनों को साकार करने का जिम्मा उठाया ट्रस्ट के अध्यक्षीय समिति के सदस्य व स्वामी राम हिमालयन यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. विजय धस्माना ने। डॉ.धस्माना की अगुवाई में ट्रस्ट निरंतर कामयाबी के पथ पर अग्रसर है। 2007 में कैंसर रोगियों के लिए अत्याधुनिक अस्पताल कैंसर रिसर्च इंस्टिट्यट (सीआरआई) की स्थापना की। 2013 में शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए जॉलीग्रांट में स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय (एसआरएचयू) स्थापना की गई। इसके तहत सभी शिक्षण संस्थाएं संचालित की जा रही हैं।

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