उत्तराखंडराजनीति

कांग्रेस और कमीशन एक सिक्के के दो पहलूः नड्डा

शहीद सम्मान यात्रा सैन्य गांव सवाड़ से शुरू

चमोली। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा 15-16 नवंबर के दो दिवसीय उत्तराखंड दौरे पर पहुंचे हैं। देहरादून के जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और केंद्रीय राज्य रक्षा मंत्री अजय भट्ट ने उनका स्वागत किया। इस दौरान बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक भी वहां पर मौजूद थे। इसके बाद नड्डा और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शहीद सम्मान यात्रा की शुरुआत करने चमोली जिले के देवाल ब्लॉक के सैन्य गांव सवाड़ पहुंचे, यहां उन्होंने शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि दी। यहां पहुंचने पर ब्लॉक प्रमुख दर्शन दानू ने नड्डा को चांदी का मुकुट पहनाकर उनका स्वागत किया।
गौर हो कि वीरों की भूमि उत्तराखंड में शहीद सम्मान यात्रा का आयोजन 15 नवंबर से 7 दिसंबर तक किया जा रहा है। इसमें लगभग 1,734 वीर शहीदों के आंगन से मिट्टी संजोकर सैन्य धाम तक पहुंचायी जाएगी। इस मौके पर बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि, वो आज ऐसी वीर भूमि पर आए हैं जहां के वीर सपूतों ने चाहे वो प्रथम विश्वयुद्ध या द्वितीय विश्वयुद्ध था, चाहे वह 1965 की लड़ाई, 1971 की लड़ाई या कारगिल की लड़ाई थी, सभी संग्राम में अपने आप को समर्पित किया और लड़ाई लड़ी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और कमीशन एक ही सिक्के के दो पहलू हैं, जहां कांग्रेस है वहां कमीशन है और जहां एनडीए है, जहां भाजपा है वहां मिशन है।
नड्डा ने कहा कि, मोदी सरकार में आज भारतीय सेना में 36 राफेल, 28 अपाचे हेलीकॉप्टर, 15 चिनूक हेलीकॉप्टर जुड़ चुके हैं। पहले की सरकारों में हमारे फौजी भाई बुलेट प्रूफ जैकेट की कमी झेल रहे थे। मोदी सरकार ने 1।86 लाख बुलेट प्रूफ जैकेट भारतीय सेना को समर्पित किया। उत्तराखंड में आयुष्मान भारत योजना के तहत 5 लाख रुपये तक का हेल्थ इंश्योरेंस का लाभ सभी पात्र लाभार्थियों को मिल रहा है। पीएम किसान सम्मान निधि के तहत उत्तराखंड के सभी पात्र किसानों को सम्मान निधि की 10 किस्त पहुंच चुकी हैं।

देवभूमि ने वीरों ने हर मोर्चे पर कौशल दिखाया है  मुख्यमंत्री धामी ने कुछ इस तरह वीर सैनिकों को याद करते हुए अपने संबोधन की शुरुआत की,
देशभक्ति क्या होती है, पूछो जरा जवानों से,
भरा पड़ा इतिहास हमारा, वीरों के बलिदानों से

सीएम ने कहा कि, ये उनका सौभाग्य है कि उन्हें सवाड़ की धरती को नमन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। चाहे प्रथम विश्वयुद्ध हो, द्वितीय विश्व युद्ध हो, पेशावर कांड हो, देश की आजादी की लड़ाई हो या आजादी के बाद के युद्ध हों, इस धरती के वीरों ने अग्रिम पंक्ति में रहकर अपना कौशल दिखाया है और अपना सर्वाेच्च बलिदान दिया है। हर जगह सेना के वीर जवानों ने ये दिखाया है कि भारत पर आक्रमण करना तो बहुत दूर की बात है, कोई आंख भी उठाएगा तो भारतीय सेना उसको मुंहतोड़ जवाब देगी।
सीएम ने कहा कि, उत्तराखंड ने लाखों वीर सैनिक इस देश को दिये हैं, जिन्होंने अपने अदम्य साहस से ये दिखला दिया कि देवभूमि न केवल समस्त विश्व को शान्ति का मार्ग दिखा सकती है, बल्कि शौर्य और वीरता को भी प्रदर्शित कर सकती है।

सैनिक पुत्र होने के नाते देखा है हर दर्द
चमोली।  सीएम ने कहा कि, एक सैनिक का पुत्र होने के नाते उनके लिए ये गर्व का विषय है कि वो वीर सैनिकों को समर्पित इस कार्यक्रम में उपस्थित हैं। सैनिक की वीरता तो बाल्यकाल से देखी ही है, और उनके परिजनों का संघर्ष भी देखा है। सीएम ने कहा कि, उन्होंने उस मां-बाप का दर्द देखा है, जिसका बेटा सीमा पर देश की आन-बान के लिए लड़ रहा है, उस पत्नी के आंखों के आंसू देखे हैं जो पति के आने की बांट जोहते-जोहते कब बूढ़ी व बीमार हो जाती है, पता ही नहीं चलता। उन बच्चों की सिसकती हुई किलकारियों को सुना है जो अपने पिता से गले मिलने को व्याकुल हों। कितना संघर्ष है एक सैनिक के जीवन में, लेकिन इसके बावजूद वो दृढ़ता पूर्वक अपने देश के स्वाभिमान को बचाने के लिए हमेशा तत्पर रहता है।वीर शहीदों का सम्मान करने की योग्यता हम पर नहीं है लेकिन उनको सम्मानित कर हम स्वयं को सम्मानित महसूस करते हैं। सैनिकों के प्रति हमारी सरकार का और हमारी पार्टी का समर्पण किसी से छिपा नहीं है।

शहीदों के सपनों का उत्तराखंड बनाकर रहेंगे
मुख्यमंत्री ने कहा कि, जब तक हम शहीदों के सपनों का उत्तराखंड नहीं बना देते तब तक हम चौन से नहीं बैठेंगे। उनको पूरा विश्वास है कि हम अंत्योदय के अपने अंतिम लक्ष्य को अवश्य पूरा करेंगे और 2025 तक उत्तराखंड को भारत का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाएंगे।

सैनिकों का दर्द समझती है केंद्र सरकार  धामी ने कहा कि, केंद्र और राज्य सरकार का प्रयास है कि हम शहीदों के अभूतपूर्व योगदान को हमेशा याद रखें। हम शहीद सैनिकों के सम्मान में सैन्य धाम के निर्माण कर आगामी पीढ़ियों को प्रेरणा प्रदान करने का कार्य करेंगे। केंद्र सरकार सैनिकों का दर्द समझती है, यही वजह है कि हमने सैनिकों और पूर्व सैनिकों के हित में कई योजनाएं शुरू की गई हैं। सीमा पर केंद्र सरकार ने ऑल वेदर रोड बनाई हैं और मेक इन इंडिया के तहत बुलेट प्रूफ जैकेट भारत में बन रही हैं। केंद्र सरकार ने रक्षा सौदों में दलाली पूरी तरह से खत्म की है। वन रैंक-वन पेंशन की मांग वर्ष 1972 से थी, लेकिन इस पर ध्यान सिर्फ मोदी सरकार ने दिया, क्योंकि वे एक सैनिक का दर्द समझते ही नहीं हैं, बल्कि उसे दूर करने की कोशिश भी करते हैं।

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