उत्तराखंडराजनीति

उत्तराखंड का मिथक, जो शिक्षा मंत्री बना वो अगला चुनाव हारा

मंत्री अरविंद पांडे के लिए बड़ी चुनौती

चार बार विधायक रह चुके हैं शिक्षा मंत्री पांडे


हल्द्वानी। उत्तराखंड के इतिहास में एक मिथक है कि जो भी विधायक शिक्षा मंत्री बनता है, वह अपना अगला विधानसभा चुनाव हार जाता है। ऐसे में 2022 विधानसभा चुनाव में गदरपुर विधानसभा सीट से विधायक और शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे के सामने फिर से विधायक बनने की चुनौती है। अरविंद पांडे पिछले 20 साल से लगातार विधायक चुने जाते आ रहे हैं।
अरविंद पांडे ने अपना पहला चुनाव 2002 और दूसरा 2007 में बाजपुर से लड़ा और जीते। इसके बाद 2012 में बाजपुर सीट आरक्षित होने के बाद पिछले 10 साल से गदरपुर विधानसभा सीट से चुनाव जीतते आ रहे हैं। पिछले 2017 के विधानसभा चुनाव में जीत के बाद उन्हें मंत्री पद देकर शिक्षा विभाग दिया गया। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल है कि क्या अरविंद पांडे पांचवीं बार विधायक बनकर इतिहास रचेंगे।
भाजपा के वरिष्ठ नेता और संघ से नाता रखने वाले अरविंद पांडे लगातार चार बार (2022, 2007, 2012 और 2017) चुनाव जीत चुके हैं। 2017 में अरविंद पांडे को गदरपुर सीट पर 41,530 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस के राजेंद्र पाल को 27,424 वोट हासिल हुए थे। अरविंद पांडे ने करीब 14 हजार मतों से जीत हासिल की थी। इस दौरान अरविंद पांडे त्रिवेंद्र सरकार में पहली बार शिक्षा मंत्री बने। हालांकि, उत्तराखंड में राजनीतिक उथल-पुथल हुई। तीन मुख्यमंत्री बदल दिए गए। लेकिन अरविंद पांडे अभी भी शिक्षा मंत्री के पद पर बने हुए हैं।
उत्तराखंड में मिथक है कि जो विधायक शिक्षा मंत्री बनता है, उसके बाद वह अगला चुनाव हार जाता है। जैसे कि 2000 में अंतरिम सरकार में प्रदेश के पहले शिक्षा मंत्री तीरथ सिंह रावत बने। लेकिन 2002 के विधानसभा चुनाव में वह हार गए। 2002 में एनडी तिवारी की सरकार बनी और नरेंद्र सिंह भंडारी को शिक्षा मंत्री बनाया गया। हालांकि, 2007 के विधानसभा चुनाव में नरेंद्र सिंह भंडारी हार गए।

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