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नमामि गंगे: सफाई के नाम पर भ्रस्टाचार की डुबकी

नमामि गंगे केंद्र सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट

ऋषिकेश, 21 जनवरी। जिस गंगा के नाम पर सुचिता और ईमानदारी दुहाई दी जाती है, उसी की सफाई के नाम पर नगर निगम ऋषिकेश ने भ्रस्टाचार की डुबकी लगा ली है। यकीन नहीं होता तो गंगा सफाई के नाम पर हुए खुराफात का खुलाशा देखिए।
आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक जिस कंपनी को गंगा के घाटों की सफाई का जिम्मा दिया गया वो खुद इम्प्लाइयों के हक की अपहरणकर्ता साबित हुई है। इस कंपनी का नाम . एम एस / केएल मदान गवर्नमेंट कंट्रैक्टर है। मजे की बात तो ये है कि गंगा सफाई का ठेका लिए इस कंपनी का निगम प्रशाशन के पास न तो ईएसआई और न ही पीएफ रिकार्ड संरक्षित है। 

इसके बावजूद 3 करोड़ 57 लाख 14 हज़ार 728 रुपये का ठेका आंख मूंद कर दे दिया गया। मज़े की बात ये है कि निविदा आमंत्रण के वक्त टेक्निकल और फाइनेंसियल बिड के दस्तावेज सरकारी इंजीनियरों की निगरानी में पास किये जाते हैं। इसके बावजूद ईएसआई और पीएफ सर्टिफिकेकेट किन परिस्थितियों में नजरअंदाज किये गए, ये सवालों के घेरे में में है। निगम अफसरों का कहना है कि ठेकेदार कंपनी ने जो दस्तावेज सम्मिलित किये वो आरटीआई में उपलब्ध कराए जा चुके हैं। सवाल ये है कि गंगा सफाई के नाम पर न तो कर्मचारियों के हित संरक्षित किये गए न हो जीवन निधि सुरक्षित की गई। दिलचस्प पहलू ये है कि निगम के इंजीनियरों ने फर्म की इस फर्जीवाड़े पर एतराज भी नहीं जताया। फिलहाल ये जांच का विषय है कि गंगा सफाई के नाम पर ठेकेदार और निगम प्रशासन ने क्या मलाई हड़प की।

इस सबंध मेंं नगर आयुक्त नगर निगम  का कहना है कि  जो सूचना हमारे पास थी वो हमने आरटीआई के तहत उपलब्ध करवा दी। इसके अलावा हमारे पास इस संबंध में कोई दस्तावेज नहीं है।

नगर निगम के आधिशासी अभियंता का कहना है कि आरटीआई के तहत जो सूचना मागी गई वो हमने उपलब्ध करवा दी। इस संबध में इसके अलावा हमारे पास अन्य कोई भी दस्तावेज उपलब्ध नहीं है।

 

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