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*अभी और लोकप्रियता हासिल करेंगे मोदी, विरोधी होंगे परास्त : ज्योतिषाचार्य पंकज पैन्यूली*

ऋषिकेश, 12 फरवरी। उत्तराखंड के जाने-माने ज्योतिषाचार्य पंकज पैन्यूली के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जन्म कुंडली का विश्लेषण कर वह बता रहे हैं कि जानें कैसे नीचभंग राजयोग ने बनाया नरेन्द्र मोदी को भारत का यशस्वी प्रधानमंत्री दशकों बाद भारत सहित पूरे विश्व के राजनैतिक इतिहास में भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक ऐसी शख्सियत के तौर पर उभरे हैं कि हाल फिलहाल भारतीय राजनीति में उनके आसपास अथवा यूं कहें कि उनकी हैसियत को चुनौती देने वाला कोई भी नेता,पक्ष या विपक्ष में दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहा है। तो आइए जिन प्रगतिकारक मूलभूत गुणों और व्यापक एवं प्रभावी व्यक्तित्व के कारण प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वयं को राजनैतिक वैश्विक पटल पर अग्रणीय पंक्ति पर लाकर स्थापित किया है। उन गुणों और व्यापक एवं प्रभावी व्यक्तित्व को अभि सिंचित करने वाले ग्रह नक्षत्रों का विश्लेषण आज हम आपके सामने प्रस्तुत करने का प्रयास कर रहे हैं।
इस विश्लेषण से हम जानेंगे कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जन्म कुण्डली में वह कौन से योग हैं,जो उन्हें अति ऊर्जावान,क्रियात्मक,व्यवस्थापक,अति तीक्ष्ण बुद्धिमत्ता,अकाट्य तर्कशक्तिवान,निडर,कठोर से कठोर निर्णय लेने वाला,पल भर में विपरीत परिस्थितियों को भी अनकूल बना लेने वाला,त्वरित और प्रभावी निर्णय लेने वाला,राजनीति में हर पायदान पर उत्तरोत्तर सफलता दिलाने वाले हैं और सतत उन्नति के साथ आगे बढ़ते हुए प्रधानमंत्री पद तक पहुंचाने वाले योग के साथ ही पारिवारिक मोह बन्धन से पृथक कराने वाले आदि योगों के बारे में विस्तार पूर्वक जानते हैं।
इस क्रम में सबसे पहले उनके जन्म समय का विवरण इस तरह से है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जन्म 17 सितम्बर 1950 को प्रातः 11.00 बजे महेसाणा, गुजरात में हुआ।
इस लिहाज से उनकी कुण्डली इस प्रकार बनती है।
उपरोक्त कुंडली में बनने वाले योग, जिन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को सफलतापूर्वक राजनीति के उच्चतम शिखर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है। पहले संख्यानुसार इन योगों को जानते हैं इसके बाद इन योगों का परिणाम जानेंगें।
1.नीचभंगराज योग। (अति उत्तम राजयोग)
2.लग्नेश और भाग्येश का युति योग। (भाग्य,मान,सम्मान एवं पद प्रतिष्ठा कारक योग)
3.बृहस्पति और शुक्र से बनने वाला सरस्वती योग। (उन्नत बुद्धिदाता सरस्वती योग)
4.दशमेश और लाभेश का युति सम्बन्ध योग। (अधिकार सम्पन्न कारक श्रेष्ठ राज योग)
5.विद्या,बुद्धि कारक उच्चस्थ बुध की पंचम बुद्धिभाव में दृष्टि। ( श्रेष्ठ तर्क शक्तिकारक योग)
6.बुधादित्य योग।
7.बुद्धि विवेक और आत्माकारक सूर्य की पंचम भाव में मैत्रिपूर्ण दृष्टि। (तर्क,मन्त्रणाषक्ति,अविष्कारक सोच,षोधप्रवृत्ति,अध्यात्म के प्रति गहन रूचि एवं नेतृत्व शक्तिकारक श्रेष्ठ योग )
7.पारिवारिक मोहभंग को दर्शाने वाले योग। क. पत्नी भाव (सप्तम भाव) में मंगल की पूर्ण कुरुर दृष्टि।
ख.सप्तम (पत्निभाव) व सप्तमेश (पत्नीभाव)शुक्र का पीड़ित होना।
ग.चूंकि किसी भी पुरूष की कुंडली में शुक्र को पत्नी का अथवा वैवाहिक सुख का मुख्य कारक माना जाता है। उसका पी​ड़ित होना वैवाहिक जीवन को या तो असंतुलित बना देता है या फिर अधिक पीड़ित होने पर व्यक्ति को वैवाहिक जीवन से वंचित कर लेता है। इस परिप्रेक्ष्य में हम यदि नरेन्द्र मोदी की कुंडली की बात करें, तो उनकी जन्म कुंडली में पत्नी कारक शुक्र न केवल कारक होकर पीड़ित हो रहा है,बल्कि पत्नी भाव का भी स्वामी बन रहा है। अतः सप्तम,सप्तमेश और कारक का पीड़ित हो जाना वैवाहिक सुख से वंचित कर लेता है।
घ.सप्तमेश शुक्र का पृथकताकारक राहू सूर्य से पपापकर्तरी योग में आना।
ङ. नवमांश कुंडली में भी वैवाहिक जीवन का पूर्णतः प्रभावित दिखना।
उपरोक्त योग जो नरेन्द्र मोदी की कुंडली में बन रहे हैं, उन योगों में से कुछ योगों का फल
1.नीच भंग राजयोग का फलश् यथा -नीचस्थितो जन्मनि यो ग्रहास्यात्…………………………………… राजा भवेद्धार्मिक चक्रवर्ती। भावार्थ-जब किसी भाव में कोई ग्रह नीच राशि में स्थित हो और उस नीच राशि का स्वामी या उसका उच्चनाथ लग्न से या चन्द्रमा से केन्द्र भाव (1.4.7.10) में आता हो,तो अति विशिष्ट नीचभंग राजयोग का निर्माण होता है। ऐसे योग में जन्म लेने वाला व्यक्ति निःसन्देह ‘राजा भवेद्धार्मिक चक्रवर्ती’ प्राचीन समय में राजा की पदवी और वर्तमान समय में अथवा प्रजातांत्रिक व्यवस्था में अधिकार सम्पन्न पद प्राप्त करते हैं। उदाहरण के तौर पर जिस तरह से भारत आदि देशों में प्रधानमंत्री का पद और अमेरिका आदि देशों में राष्ट्रपति का पद है। साथ ही ऐसे लोग धार्मिक और आध्यात्मिक भावना से भी ओतप्रोत होते हैं‘राजा भवेद्धार्मिक’।
2.लग्नेश और नवमेश/भाग्येश की युति योग का फल- (भाग्य,मान,सम्मान एवं पद प्रतिष्ठा कारक योग) लग्न भाव शारीरिक स्वास्थ्य,स्वभाव,प्रवृत्ति,व्यक्तित्त्व,मन मस्तिष्क में उठने वाले विचार,विचारों में दृढ़ता,मानसिक स्थिरता,दृष्टिकोण (यानि नजरिया संसार और संसारी लोगों के प्रति आपका दृष्टिकोण) आदि के अतिरिक्त मानप्रद अर्थात पद प्रतिष्ठा का भी मुख्य कारक माना जाता है। इसी प्रकार नवम भाव को भाग्य के अलावा ज्ञान,अध्यात्म के प्रति रूचि व राज्यकृपा का कारक माना जाता है।
अर्थात प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कुण्डली में ज्ञान,मानसिकता,बुद्धिकौशल,मन मस्तिष्क में उठने वाले विचार,पद प्रतिष्ठा एवं राज्यकृपा कारक भावों के स्वामियों की शुभ लग्न भाव में युति एक उत्तम राजयोग का निर्माण कर रही है। यह राजयोग शुभ भावों के स्वामियों चन्द्र एवं मंगल से बन रहा है,अतः यह राजयोग त्यागपूर्ण बन जाता है। यही कारण है कि नरेन्द्र मोदी जी राजनीति के शिखर में होते हुए भी एक कर्मयोगी की भांति जीवन यापन कर रहे हैं।
4.दषमेश और लाभेश का युति सम्बन्ध योग-(अधिकार सम्पन्न कारक श्रेष्ठ राज योग) सामान्यतःकुण्डली के दशम भाव को कर्मक्षेत्र कहा जाता है। कर्मक्षेत्र यानि व्यक्ति की आजीविका अथवा ‘कर्म’ का भाव। अर्थात दशम भाव जब अति शुभ स्थिति में होता है,तो जातक को नौकरी आदि में उच्चपद की प्राप्ति होती है और व्यवसाय में पूर्ण सफलता मिलती है। इसी प्रकार यदि ऐसा व्यक्ति राजनीति के क्षेत्र में जाता है,तो वह सफल नेता बनता है। हां, यह अलग बात है कि अन्य भी जो नौकरी,व्यवसाय,पद,प्रतिष्ठाकारक अंग हैं,उनका भी मजबूत और शुभ होना परम आवश्यक होता है। इसी प्रकार ग्यारहवें भाव को लाभ और राज्य भाव अथवा राजसत्ता कहा जाता है। वस्तुतः कुण्डली के दशम और ग्यारहवें भाव की शुभ स्थिति व्यक्ति की उन्नति और प्रगति के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण अंग माना जाता है। नरेन्द्र मोदी की कुण्डली में दशम भाव का स्वामी सूूर्य है,सूर्य को ज्योतिष में पद,प्रतिष्ठा का विशेष कारक माना जाता है,पहली शुभ स्थिति,दूसरी शुभ स्थिति सूर्य स्वयं लाभ व राज सत्ता के भाव में बैठा हुआ है। तीसरी शुभ स्थिति लाभ व राजसत्ता के भाव का स्वामी बुध यहां पर अपनी उच्च राशि में बैठा हुआ है। चौथी शुभ स्थिति दशम और एकादशेश का एकादश भाव में एक साथ होना। कुल मिलाकर उपरोक्त नियमानुसार नरेन्द्र मोदी जी की कुण्ड़ली में बहुत अच्छे राजयोग का निर्माण हो रहा है।
6.बुधादित्य योग-सूर्य और बुध के एक साथ होने पर ‘बुधादित्य योग’बनता है। इस योग को काफी शुभ और राजयोग कारक माना गया है। लेकिन इस योग को तभी अधिक शुभ और राजयोग कारक माना जाता है,जब सूर्य और बुध शुभ स्थिति एवं अपनी उच्चराशि आदि में बलवान होकर स्थित हों। नरेन्द्र मोदी की कुण्डली में बुध अपनी उच्च राशी कन्या में स्थित है और सूर्य मित्र राशि में विराजमान हैं। अतः नरेन्द्र मोदी की कुंडली में बनने वाला बुधादित्य योग पूर्णरूपेण शुभ एवं राजयोगकारक है।
वर्तमान महादशा व वर्तमान समयकाल में नरेन्द्र मोदी की मंगल की महादशा चल रही है। जिसका प्रारम्भ 30 नवम्बर 21 को हुआ और 30 नवम्बर 2028 तक इसकी अवधि रहेगी। इस दशा काल में प्रधानमंत्री और नए-नए कीर्तिमान स्थापित करेंगे और अपनी योजनाओं में पूर्ण सफल होंगे। इस दशा काल में उनके विरोधी परास्त होंगे तथा उन्हें विश्वासपात्र मित्रों व अधिकारियों का खूब सहयोग मिलेगा। इस समयकाल में प्रधानमंत्री जो भी कार्य योजनाएं लाएंगे वह जनमानस के कल्याणार्थ होंगी ओैर इसके लिए उन्हें जनता का भरपूर समर्थन प्राप्त होगा, अर्थात आने वाले समय में उनकी लोकप्रियता ओैर अधिक बढ़ने वाली है। लिहाजा निःसन्देह आने वाले समय में भी उनका नेतृत्व देश को मिलने वाला है।
इस प्रकार भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कुण्डली का यथामति हमने संक्षिप्त विवरण आप सभी पाठकों की जानकारी के लिए प्रस्तुत किया है।

जय श्री कृष्णा

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