उत्तराखंडपुलिस डायरी

उत्तराखण्ड एसटीएफ ने गैगस्टर यशपाल तोमर की 153 करोड़ की सम्पत्ति की कुर्क

फिल्मी स्टाइल में देता था घटनाओं को अंजाम

गैंगस्टर यशपाल तोमर की 153 करोड़ रूपये की चल-अचल सम्पति कुर्क
देहरादून।स्पेशल टास्क फोर्स ने गैंगस्टर अधिनियम 1986 के अंतर्गत अब तक की सबसे बड़ी कार्यवाही करते हुवे एक गैंगस्टर की एक सौ त्रिपन करोड़ की चल अचल सम्पत्ति की कुर्क किया।
उत्तराखंड एसटीएफ के एसएसपी अजय कुमार के अनुसार कोर्ट के आदेशों के बाद एसटीएफ उत्तराखंड ने गैंगस्टर यशपाल तोमर की एक सौ त्रिपन करोड़ उनतीस लाख की अचल व चल संपत्ति जिसमे लक्सरी वाहन में बुलेटप्रूफ फॉर्च्यूनर आदि को जिला मजिस्ट्रेट हरिद्वार के आदेशों चलते कुर्क कराया। एसटीएफ ने कार्यवाही करते हुए गैंगस्टर सतपाल तोमर की संपत्ति जिसमे अवैध तरीके से अर्जित की गई कीमती सम्पत्तियों की कुर्की अटेचमेन्ट की कार्यवाही उत्तराखण्ड सहित उत्तरप्रदेश व दिल्ली में  एसटीएफ ने सफलता पाई।बताया गया है की आपराधिक गतिविधियों से अर्जित की गयी अब तक करीब 153 करोड़ रूपये की चल-अचल सम्पति संज्ञान में आई है जिसे कोर्ट के आदेश पर एसटीएफ ने कुर्क किया। उत्तराखंड के डीजीपी अशोक कुमार ने कहा कि राज्य में किसी भी गैंगस्टर को शरण नहीं दी जाएगी। साथ ही अवैध रूप से संपत्ति हासिल करने वाले गैंगस्टर के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। वही डीजीपी ने उत्तराखंड एसटीएफ की तारीफ करते हुए कहा कि एसटीएफ निसंदेह अपने काम में जुटी है। बताया गया है की शातिर यशपाल तोमर ने हरिद्वार के एक बडे व्यापारी से उसकी सम्पत्ति हड़पने के लिये धमकी दी थी।इस प्रकरण में  थाना ज्वालापुर हरिद्वार में यशपाल तोमर के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया गया था और कि अपने इस मामले में गंभीरता के साथ जांच करते हुए रिपोर्ट कोर्ट में सौंपी थी जिसके बाद कोर्ट ने आदेश करते हुए कुर्की के आदेश जारी किए गए।शातिर यशपाल तोमर के कारनामों की ऐसी कहानी सामने  आई जो वॉलीवुड की फिल्म ‘‘सात उच्चके’’ से मिलती जुलती थी। जिसमें किरदार किसी की सम्पत्ति हड़पने के लिये या किसी पर दबाव बनाने के लिये या किसी को जेल भेजने के लिये एक काल्पनिक घटना को स्टोरी बनाकर पुलिस के सामने इस तरह से प्रस्तुत करता है कि वो तथ्यों के आधार पर बिलकुल सच लगे और निर्दाेश व्यक्ति के विरूद्ध मुकदमा दर्ज कराकर उसे जेल भेज दिया जाता है।

यूपी का मामूली किसान कैसे बना करोड़पति
देहरादून।यशपाल तोमर मूल रूप से ग्राम बरवाला थाना रमाला जनपद बागपत का रहने वाला है। जो पेशे से किसान था। इसके परिवार में पांच भाईयों के पास करीब 9 बीघा जमीन थी। वहीं से यशपाल तोमर थाना बरवाला के तत्कालीन एक पुलिस अधिकारी के सम्पर्क में आया और पुलिस की सारी गतिविधियों को करीब से जानकर एक सफेदपोश शातिर अपराधी बन गया।जिसने अब तक  करीब 153 करोड़ की सम्पत्ति विभिन्न राज्यों में अपने एवं अपने निकट रिश्तेदार के नाम पर अर्जित कर ली। यशपाल तोमर वर्ष 2002 में थाना कोतवाली हरिद्वार से पुलिस पर जानलेवा हमला करने व अवैध हथियार रखने व धोखाधडी के जुर्म में गिरफ्तार हुआ था।जेल में रहकर उसने अपना नेटवर्क स्थापित किया इसके बाद वर्ष 2004 में हरिद्वार के एक व्यापारी के विरूद्ध थाना सरसावा व साहिबाबाद थाने में अपने साथियों के साथ मिलकर अपहरण व बलात्कार का फर्जी मुकदमा दर्ज करा दिया गया। जिस मुकदमें की आड़ में उस पर समझौते का दबाव बनाकर उसकी भूपतवाला स्थित करोडो की जमीन को औने पौने दाम में खरीद अपने सहयोगी के नाम पर करा लिया। इसके बाद यशपाल तोमर ने उपरोक्त मोडस अपरेन्डी का प्रयोग करते हुये इस प्रकार के अपराध करने के लिये एक बड़ा नेटवर्क स्थापित कर लिया। उत्तराखण्ड, उत्तरप्रदेष, पंजाब तथा राजस्थान राज्य के विभिन्न थानो में अलग-अलग भोले-भाले व्यापारियों/किसानो के विरूद्ध काल्पनिक स्टोरी बनाकर संगीन धाराओं जैसे बलात्कार, जान से मारने का प्रयास, छेडछाड, चोरी आदि के विभिन्न मुकदमें पंजीकृत कराये गये। इसके गैंग में सहयोगी के रूप में कई अन्य लोग व महिलायें भी शामिल है। महिलायें यशपाल तौमर की प्लानिंग के अनुसार बलात्कार और छेड़खानी के अभियोग दर्ज कराया करती थी। बाद में इन मुकदमों की आड़ में यशपाल तोमर समझौते के नाम पर उनसे उनकी सम्पत्ति को हासिल कर लेता था।

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गैंग की लड़कियों का सहारा लेकर कराता था मुकदमा
देहरादून। यशपाल तोमर के ने 28 मुकदमें  दर्ज कराए जिनमें  निर्दाेष लोगों को ब्लैकमेल करके दबाव बनाकर उनकी सम्पत्ति को हासिल कर अपने लोगो के नाम करा लेता था। इसने इस दौरान अपने सम्बन्ध बड़े रसुखदार लोगों से भी बना लिये। जिसमें शासन-प्रशासन, पुलिस व सफेदपोश रसूख वाले लोग थे। यशपाल तोमर और उसके साथियों का इतना भय था कि कोई भी व्यक्ति इसके विरूद्ध शिकायत करने की हिम्मत नहीं कर पाता था। जिसने भी थोड़ा हिम्मत जुटायी तो वह यशपाल तोमर के बुने जाल में फंसकर जेल चला गया।
जांच के दौरान एसटीएफ की टीम ने पीड़ित लोगों को न्याय दिलाने का विष्वास दिये जाने पर यशपाल तोमर और उसके साथियों के खिलाफ मुकदमें दर्ज कराये गये। इन मुकदमों की जांच पुलिस मुख्यालय के आदेश पर जनपद हरिद्वार से स्थानान्तरित कर एसटीएफ को सुपुर्द हुई। विवेचना से यशपाल तोमर के विरूद्ध अब तक करीब 13 मुकदमें विभिन्न राज्यों में संगीन धाराओं में दर्ज होने पाये गये हैं।

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