उत्तराखंडतिरंगा

देश आजाद हुआ परंतु अंग्रेजी मानसिकता बनी रही: डॉक्टर चंडी प्रसाद घिल्डियाल

ऋषिकेश।अनेकों महापुरुषों के संघर्ष और बलिदान के फल स्वरुप 15 अगस्त सन 1947 को हमारा देश लंबी गुलामी के बाद आजाद तो हो गया परंतु अंग्रेजी मानसिकता अभी तक बनी रही

उपरोक्त विचार सहायक निदेशक शिक्षा डॉ चंडी प्रसाद घिल्डियाल ने विश्व के पहले संस्कृत प्राथमिक विद्यालय में मुख्य अतिथि के रूप में ध्वजारोहण करने के बाद जनसमूह को संबोधित करते हुए कही

डॉक्टर घिल्डियाल ने कहा कि महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस ,चंद्रशेखर आजाद, सरदार भगत सिंह ,राजगुरु जैसे महापुरुषों के निरंतर संघर्ष और बलिदान के फलस्वरूप हम आज आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं परंतु अंग्रेजी मानसिकता अभी भी देश पर हावी है ,उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिस देश में संस्कृति और संस्कारों के प्रति प्रतिबद्धता हो वह देश ही लंबे समय तक स्वतंत्र रह सकता है और विकसित हो सकता है

शिक्षा अधिकारी ने कहा कि शिक्षा में संस्कारों का समावेश संस्कृत भाषा के सम्मान से ही संभव है ,और जब शिक्षा में संस्कारों का समावेश हो जाएगा तो देश पूर्ण रूप से स्वतंत्र कहलाएगा और जब हम आजादी की स्वर्ण जयंती मना रहे होंगे उस समय तक यह कार्य अवश्य संपन्न हो जाएगा, उन्होंने देश और प्रदेश की जनता सहित संपूर्ण शिक्षा विभाग से जुड़े लोगों को आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने की शपथ लेने की गुजारिश की

विद्यालय के प्रबंधक राज्य के मशहूर समाजसेवी गोविंद पेटवाल ने कहा कि उनका प्रयास संस्कृत शिक्षा को संरक्षण देना है और उसके लिए वे समस्त शिक्षा अधिकारियों का समय समय पर अभिनंदन करते रहेंगे

इससे पूर्व ठीक 8:00 बजे मुख्य अतिथि के रूप में सहायक निदेशक डॉ चंडी प्रसाद घिल्डियाल ने राष्ट्रगान की धुन के साथ ध्वजारोहण करते हुए परेड की सलामी ली उसके बाद उन्होंने स्वयं नेतृत्व करते हुए विद्यालय के छोटे-छोटे बच्चों और स्टाफ को साथ लेकर सारथी विहार क्षेत्र में स्वयं नारे लगाते हुए विशाल अमृत महोत्सव तिरंगा रैली निकाली रैली रिस्पना पुल, राजीव नगर होते हुए विद्यालय में आकर पूरी हुई

विद्यालय में पहुंचने पर प्राचार्य श्रीमती कविता मैथानी ने प्रबंधक गोविंद पेटवाल के साथ पूरे स्टाफ को लेकर मुख्य अतिथि सहायक निदेशक डॉ चंडी प्रसाद घिल्डियाल का मुख्य आतिथ्य स्वीकार करने के लिए धन्यवाद ज्ञापित करते हुए पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया अध्यापिका दिव्या ने उनका जीवन चरित्र पढ़कर सुनाया हेमा सिंह ने सचिव संस्कृत चंद्रेश यादव का संदेश पढ़कर सुनाया इस अवसर पर विद्यालय के नन्हे मुन्ने कलाकारों द्वारा विभिन्न साहित्यिक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गई मौके पर विद्यालय के समस्त शिक्षक, शिक्षिकाएं एवं कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में अभिभावक उपस्थित थे।

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