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एवलॉच में 25 लापता, 7 शव बरामद, 8 को किया सुरक्षित रेस्क्यू

उत्तराकाशी के द्रौपदी डॉडा-2 पर्वत चोटी पर हुआ भारी हिमस्खलन

उत्तराकाशी के द्रौपदी डॉडा-2 पर्वत चोटी पर हुआ भारी हिमस्खलन
40 प्रशिक्षुओं को दल गया था पर्वतारोहण के लिए
उत्तरकाशी। सीमांत जनपद उत्तरकाशी में द्रौपदी का डांडा 2 पर्वत चोटी के पास हिमस्खलन में अभी तक 7 शव बरामद कर लिए गए हैं। डीजीपी के मुताबिक अभी तक 8 पर्वतारोहियों को सुरक्षित रेस्क्यू कर दिया गया है। अभी तक 25 लोग लापता बताए जा रहे हैं। बचाव और राहत कार्यों के लिए एयरफोर्स ने 2 चीता हेलीकॉप्टर तैनात किए हैं, अन्य सभी हेलिकॉप्टरों के बेड़े को किसी भी अन्य आवश्यकता के लिए स्टैंडबाय पर रखा गया है।
नेहरू पर्वतारोही संस्थान के प्रधानाचार्य अमित बिष्ट ने बताया कि नीम के 40 प्रशिक्षुओं का दल द्रोपदी का डंडा-2 पर गए थे। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी देवेंद्र पटवाल ने बताया कि फंसे लोगों को निकालने के लिए निम रेस्क्यू अभियान चला रहा है। घटनास्थल पर निम के पास दो सेटालाईट फोन मौजूद हैं। रेस्क्यू अभियान के लिए निम के अधिकारियों के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है.मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से रेस्क्यू अभियान में तेजी लाने के लिए वायु सेना की मदद मांगी है। जिस पर राजनाथ ने मदद का आश्वासन दिया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एवलॉन्च में सात प्रशिक्षकों की मौत पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने ट्टीट कर शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदनाएं जताई है। इसके अलावा उन्होंने सीएम धामी से भी बात की और घटना की जानकारी ली। उन्होंने वायु सेना को बचाव और राहत अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।

चल रही थी निम की ट्रेनिंग
उत्तरकाशी। नेहरू पर्वतारोहण संस्थान से मिली जानकारी के अनुसार गत 14 सितंबर से निम में एडवांस पर्वतारोहण पाठ्यक्रम शुरू हुआ था। पाठ्यक्रम प्रशिक्षण कार्यक्रम के अनुसार, निम और तेखला रॉक क्लाइम्बिंग प्रशिक्षण क्षेत्र में रॉक-क्लाइम्बिंग प्रशिक्षण में संशोधन के बाद, 23 सितंबर को 7 ट्रेनर्स, 34 ट्रेनी और एक नर्सिंग सहायक के साथ पहाड़ पर ट्रेनिंग शुरू की गई। 25 सितंबर को सभी बेस कैंप पहुंचे।
इस कोर्स में आइस एंड स्नो क्राफ्ट की ट्रेनिंग थी. प्रशिक्षण कार्यक्रम के अनुसार शिविर-1 में हाई एल्टीट्यूड ट्रेनिंग के लिए कोर्स 2 अक्टूबर से 4 अक्टूबर तक निर्धारित किया गया था। 4 अक्टूबर को प्रशिक्षण कार्यक्रम के अनुसार ट्रेनिंग के लिए सभी लोग सुबह 4 बजे माउंट द्रौपदी का डंडा में गये। पर्वत शिखर से वापस लौटते समय 34 प्रशिक्षु और 7 पर्वतारोहण प्रशिक्षक सुबह 8ः45 पर हिमस्खलन की चपेट में आ गए।

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