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शेखावाटी के युवाओं का पैशन है देश की सेवा, 50 हजार से ज्यादा सरहद पर कर रहे हैं रक्षा


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जो बचपन में मली बदन पर, उस माटी को नमन करूं, जिस पर क ख ग लिखा था उस पाटी को नमन करूं, जो दानी सेठों की धरती और वीरों की महतारी है, उस अपनी जन्‍म भूमि शेखावाटी को नमन करूं…

यह कहावत चरितार्थ होती है शेखावाटी अंचल में. वीर प्रसूता धरा शेखावाटी के सीकर, चूरू, झुंझुनूं जिले ने देश को सर्वाधिक शहीद सैनिक देने का गौरव हासिल किया है और यही कारण है कि इस अंचल को गौरव सेनानी अंचल भी कहा जाता है. यहां के रणबांकुरे देश रक्षा के लिए हसंते-हंसते अपने प्राणों की आहूति दे देते हैं. इस अंचल से देश सेवा में जाकर देश की रक्षा करना अपना पहला कर्तव्‍य ही नहीं बल्कि अपना भविष्‍य भी इसी में तरसाते हैं. यहीं कारण है कि यहां के युवाओं के लिए सेना में रंगरूट बनकर सरहद पर तैनात होकर देश की रक्षा करना ही अपना पैशन मानते हैं.

शेखावाटी अंचल ने देश को सबसे अधिक फौजी दिए हैं और सर्वाधिक शहीद भी. शायद ही कोई ऐसा बहादुरी का तमगा हो जो इस अंचल के बहादुरों ने अपनी बहादुरी और वीरता का परिवय हासिल किया है. सीकर जिले में वर्तमान में अब तक दौ सौ अठारह शहीद हुए हैं तो शेखावाटी अंचल में हजारों की संख्‍या में शहीदों ने अपने प्राणो की आहूति देकर देश की रक्षा की है. शेखावाटी अंचल में वर्तमान में चालीस से पचास हजार सैनिक सेना में तैनात होकर सरहदों की रक्षा कर रहे हैं. कारगिल में शेखावाटी अंचल से सर्वाधिक शहीद हुए हैं. शहीदों की शहादत यात्राओं में हजारों लोग शामिल होकर शहीदों की शहादत को नमन करते हैं.

शहीद वीरांगना माताएं आने वाली पीढ़ी को भी देश रक्षा के लिए फौज में ही भर्ती कराने की बात कहती है तो कई ऐसे शहीद परिवार भी हैं, जिनकी दूसरी पीढ़ी भी सेना में तैनात है. यही वजह है कि इस अंचल के युवा देश की सेवा के लिए फौज में भर्ती होना अपना पैशन और भविष्‍य मानते हैं. सीकर के जिला सैनिक कल्‍याण अधिकारी हीर सिंह बताते हैं कि इस अंचल की माटी में देश भक्ति कूट-कूट कर भरी हुई है.

लेना चाहते हैं पुलवामा हमले का बदला
शहीदों की आदमकद प्रतिमाएं जहां युवाओं को देश रक्षा के लिए सैना में भर्ती होने की प्रेरणा देती है तो गांव ढाणियों की चौपालों पर पूर्व सनिक भी युवाओ को फौज के बहादुरी किस्‍से सुनाकर उन्‍हें फौज में भर्ती होकर देश की रक्षा के लिए प्रेरित करते हैं. पूर्व सैनिक के जज्‍बे की मिसाल यह कि हाल ही में पुलवामा हमले के बाद देश में दुश्‍मन देश पाकिसतान के खिलाफ गुससा फूट पड़ा था तो पूर्व सैनिकों का खून उबल उठा. पूर्व सैनिक कहते हैं कि देश की सेना में कार्य करने के बाद पूवै सैनिक या सैनिक रिटायर नहीं होता है. कमांडर हीर सिंह बताते हैं कि पूर्व सैनिकों ने पुलवामा हमले के समय आकर कहा कि वे सेना में दौबारा से जाकर दुश्‍मन से बदला लेना चाहते हैं.

शायद ही कोई गांव ढाणी हो जिसका नाता फौज से न हो. जब आप इंस अचंल की सड़कों से गांव ढाणियों से गुजरेंगे तो आपको देश रक्षा के लिए प्राणों की आहूति देने वाले रणबांकुरे शहीदों की आदमकद प्रतिमाएं देश भक्ति का पाठ पढ़ाकर आने वाली पीढ़ियों को देश रक्षा की प्रेरणा देती हैं. यही कारण हैं कि शहीदों को लोक देवता के रूप में पूजा जाने लगा है और शहीदों की पुण्‍यतिथि और जयंतियों पर मेलों का आयोजन होता है.

पूर्व सैनिकों का कहना है कि सेना में भर्ती होना यहा एक परंपरा भी है. पीढ़ी दर पीढ़ी कई ऐसे परिवार हैं, जिसके कई पीढ़ियों से लोग सेना में भर्ती होकर देश की सेवा और रक्षा कर रहे हैं. पूर्व सैनिक पोख्‍रमल कहते हैं कि सेना में भर्ती होना यहां पहली प्राथमिकता है और यही कारण है कि युवा सेना में भर्ती होने के लिए तैयारी करते हैं. जब भी सेना भर्ती रैली का आयोजन होता है, हजारों की संख्‍या में युवा भर्ती में शामिल होकर रंगरूट बनने की ख्‍वाहिश रखते हैं तो आमजन भी सेना के जवानों का सम्‍मान करते हैं तो शहीदों की जयंतियों और पुण्‍यतिथियों पर शहीद प्रतिमाओं पर मेले और विशाल कार्यक्रम होते है. तो शहीदों के परिजनों का सम्‍मान किया जाता है.

सरहदों पर तैनात फौजी भाईयों की बहादुरी और शहादत के कारण आज हम आजाद भारत की खुली हवा में सांस ले रहे हैं और अपने आप को सुरक्षित महसूस करते हैं. इस बहादुरी और निडरता में सर्वाधिक हिस्‍सेदारी इस वीरप्रसूता और बहादुरों की इस शेखावाटी की धरती के रणबांकुरों की है. गणतंत्र दिवस पर सभी शहीदों की शहादत को जी राजस्थान नमन करता है और सरहद पर तैनात फौजी भाईयों की सलामती की दुआ करता है


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