राजस्थान

MBS में डिटॉल के बाद लायसोल खरीद में भी हुआ खेल, फिर लगाई गई बड़ी चपत

टेंडर के कारण सुर्खियां बटोरने वाला संभाग सबसे बड़ाअस्पताल एमबीएस फिर चर्चाओ में है. इस बार लायसोल खरीद को लेकर गड़बड़झाला सामने आया है. शातिर बाबू द्वारा एक ही दिन में दो अलग-अलग आरसी (रेट कॉन्ट्रैक्ट) कर डाली.

आपको बता दे कि एक आरसी में 500 ML लायसोल की दर 330 रुपये और दूसरी आरसी में 500 ML लायसोल की दर 378 रुपये स्वीकृत हैं. इसमें चौकाने वाली बात यह है कि ऑनलाइन खुली निविदा केमिकल्स किट्स, रिएजेंट्स के लिए की जानी थी लेकिन शातिर बाबू ने मिलीभगत करके फर्म को फायदा पहुंचाने के लिए केमिकल्स की आरसी में जनरल आइटम भी शामिल कर दिए.

ऐसे समझें पूरा मामला
माइक्रोबायलॉजी विभाग हेतु 25 नवंबर 2017 को केमिकल्स, किट्स, रिएजेंट्स और अन्य संबंधित आइटम की क्रय आपूर्ति के लिए ऑनलाइन खुली निविदा (आरसी) जारी की गई थी. इसमें मैसर्स आकाश एसोसिएटस, डिसइंफेक्टेन्ट सॉल्यूशन लायसोल 500 ML की दर 330 रुपये अनुमोदित की गई. वहीं, इसी दिन 25 नवंबर 2017 को केमिकल्स, किट्स, रिएजेंट्स और अन्य संबंधित आइटम की क्रय आपूर्ति के लिए एक ओर ऑन लाइन खुली निविदा (आरसी) जारी की गई थी. इसमें मैसर्स कोटा ग्लास वर्क्स डिसइंफेक्टेन्ट सॉल्यूशन लायसोल 500 ML की दर 378 रुपये अनुमोदित की गई.

यहां हैरानी वाली बात है कि विभागाध्यक्ष/मांगकर्ता अधिकारी (माइक्रोबायलॉजी) द्वारा तकनीकी में अनुमोदित प्रतिस्पर्धात्मक न्यूनतम दरों की अनुशंसा के आधार पर क्रय समिति द्वारा संबंधित दोनों फर्मों को दो वर्ष के लिए स्वीकृति प्रदान की गई. बता दें अस्पताल अधीक्षक खुद माइक्रोबायलॉजी विभाग के हैं.

ब्लड बैंक और माइक्रोबायलॉजी
एमबीएस अस्पताल ने आरएमआरएस बजट हैड से ब्लड बैंक कोटा और माइक्रोबायलॉजी विभाग के लिए खरीद की. अस्पताल ने (लायसोल 500 ML की 378 रुपये में खरीद की. यहां भी हैरानी की बात यह है कि आरएमआरएस सोसायटी की ऑडिट में ये पकड़ में नही आई. संभागीय आयुक्त आरएमआरएस सोसायटी का अध्यक्ष होता है.

फिर होगी लीपापोती
साइकिल स्टैंड ठेका रिवकरी का मामला होनेके बाद आरएमआरएस की बैठक में मुद्दा उठा था. खुद संभागीय आयुक्त ने कार्रवाई के निर्देश दिये थे लेकिन अभी तक अस्पताल प्रशासन ने संबंधित बाबू के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है. इससे पहले डिटॉल घोटाले की जांच को लेकर बनी तीन सदस्यों की कमेटी 8 माह बाद भी डिटॉल की रेट का पता नहीं लगा पाई.

डिटॉल खरीद का मामला पहुंचा एसीबी
एमबीएस में डिटॉल खरीद घोटाले का खुलासा करने के बाद अस्पताल प्रशासन ने जांच कमेटी गठित की थी. आठ महीने गुजर जाने के बाद भी जांच कमेटी डिटॉल की रेट का पता नहीं लगा पाई. एक महीने पहले ही एक सामाजिक कार्यकर्ता ने एमबीएस में डिटॉल घोटाले, डस्टबिन खरीद सहित पिछेल दो वर्ष में हुए समस्त “फुटकर-लोकल” टेंडर के तहत खरीदारी की जांच की मांग करते हुए एसीबी में शिकायत दी है. यही नहीं, शिकायतकर्ता ने लिखा है कि जांच में लेट-लतीफी से जिम्मेदारों की मंशा भी आरोपियों को बचाने की प्रतीत हो रही है.

 


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