उत्तराखंडनई दिल्ली

राष्ट्रपति कोविंद ने कहा, ‘प्रधानमंत्री उज्‍जवला योजना’ की उपलब्धियां गर्व करने योग्य हैं

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि जन-कल्याण के लिए सरकार ने कई अभियान चलाए हैं. इनमें ‘प्रधानमंत्री उज्‍जवला योजना’ की उपलब्धियां गर्व करने योग्य हैं. लक्ष्य को पूरा करते हुए आठ करोड़ लाभार्थियों को इस योजना में शामिल किया जा चुका है. ऐसा होने से जरूरतमंद लोगों को अब स्वच्छ ईंधन की सुविधा मिल पा रही है. 71वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम संदेश में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा, “जनता की भागीदारी के कारण ‘स्वच्छ भारत अभियान’ ने बहुत ही कम समय में प्रभावशाली सफलता हासिल की है. भागीदारी की यही भावना अन्य क्षेत्रों में किए जा रहे प्रयासों में भी दिखाई देती है – चाहे रसोई गैस की सब्सिडी को छोड़ना हो, या फिर डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना हो.”

राष्ट्रपति ने कहा कि ‘प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना’ अर्थात ‘सौभाग्य योजना’ से लोगों के जीवन में नई रोशनी आई है. ‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि’ के माध्यम से लगभग 14 करोड़ से अधिक किसान भाई-बहन प्रति वर्ष छह हजार रुपये की न्यूनतम आय प्राप्त करने के हकदार बने हैं. इससे हमारे अन्नदाताओं को सम्मानपूर्वक जीवन बिताने में सहायता मिल रही है.

इस दौरान राष्ट्रपति कोविंद ने देश को आगे बढ़ाने में लोगों के सहयोग की भी अपील की. उन्होंने कहा, “मेरे प्रिय देशवासियों बढ़ते हुए जल-संकट का प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए ‘जलशक्ति मंत्रालय’ का गठन किया गया है तथा जल संरक्षण एवं प्रबंधन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है. मुझे विश्वास है कि ‘जल जीवन मिशन’ भी ‘स्वच्छ भारत अभियान’ की तरह ही एक जन आंदोलन का रूप लेगा.”

उन्होंने कहा, “सरकार की प्रत्येक नीति के पीछे जरूरतमंद लोगों के कल्याण के साथ-साथ यह भावना भी होती है कि ‘सबसे पहले राष्ट्र हमारा.’ वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के लागू हो जाने से ‘एक देश, एक कर, एक बाजार’ की अवधारणा को साकार रूप मिल सका है. इसी के साथ ‘ई-नाम’ योजना द्वारा भी ‘एक राष्ट्र के लिए एक बाजार’ बनाने की प्रक्रिया मजबूत बनाई जा रही है, जिससे किसानों को लाभ पहुंचेगा. हम देश के हर हिस्से के सम्पूर्ण विकास के लिए निरंतर प्रयासरत हैं, चाहे वह जम्मू-कश्मीर हो या लद्दाख हो. पूर्वोत्तर क्षेत्र के राज्य हों या हिंद महासागर में स्थित हमारे द्वीप-समूह हों.”

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