उत्तराखंड

सरकारी भूमि पर कब्जा जमाए बैठे हैं 68 परिवार

गोठिया परिवारों की आड़ में सालों से कुल 14 हेक्टेयर भूमि पर अवैध कब्जा


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हाईकोर्ट के हस्तक्षेप पर जागा सरकारी अमला, किया मौका मुआयना
ऋषिकेश। वन विभाग की जमीनें अवैध कब्जेदारों की गैरकानूनी फितरत का शिकार हो गई हैं। आलम ये है कि गौहरी रेंज अंतर्गत कुंनाउ गांव में गोंठ जनजातियों के 36 परिवारों को बसाने के लिए 7.383 हेक्टेयर भूमि आवंटित की गई थी। देखते ही देखते यहां इस समय करीब 68 परिवार अवैध रूपबास काबिज हो गए हैं। ये मामला जनहित याचिका के जरिये हाईकोर्ट पहुंचा तब जाकर वन विभाग व स्थानीय प्रशासन ने चहलकदमी शुरू की है। हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद आदेश दिया है कि संबंधित विभाग 1 जुलाई तक अपना पक्ष पेश करें। फिलहाल इस मामले के बाद न सिर्फ अधिकारी बल्कि भूमाफियाओं में खलबली मची हुई है।
गौरतलब है कि इसी क्रम में जिलाधिकारी कार्यालय पौड़ी की ओर से एक पत्र जारी किया गया है कि वन विभाग/राजाजी राष्ट्रीय पार्क प्रशासन राजस्व विभाग और स्थानीय प्रशासन से समन्वय स्थापित कर स्थलीय सर्वेक्षण करें। इसी के तहत एसडीएम पौड़ी, तहसीलदार, वार्डन राजाजी पार्क से संयुक्त सर्वे किया है। इस मामले में रेंजर धीर सिंह ने बताया कि सर्वे हो चुका है। अब रिपोर्ट कोर्ट को सौंपी जाएगी।
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लोग बसते गए, जमीन अवैध कब्जे में खपती गई
ऋषिकेश। दरअसल अवैध कब्जे की नींव 1975 में पड़ी। अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासी ( वन अधिकारों की मान्यता)अधिनियम 2006 एवं तत्संबंधी नियम 2007 के तहत गठित समिति ने 1975 में भूमि आवंटित की थी। कुल 48 दावों के क्रम के 36 परिवारो को भूमि आवंटित हुई। देखते ही देखते अब 68 परिवार यहां काबिज हो चुके हैं। मजे की बात ये है कि कई भूमाफियाओं ने यहां सैकड़ों बीघा भूमि तक कब्जा ली है और समाजसेवा के नाम पर व्यवसाय संचालित कर रहे हैं।
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कोर्ट ने कहा है कि 1 जुलाई तक मामले का निस्तारण करें। इसका आशय अवैध निर्माणों के ध्वस्तीकरण से है। कई ऐसे रसूखदार हैं जिन्होंने छद्म नाम पर सैकड़ों बीघा भूमि हड़प रखी है।
विवेक शुक्ला, याचिकाकर्ता

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