उत्तराखंड

ईशा कलूड़ा चौहान ने रंगोली के माध्यम से अष्टांग योग का परिचय दिया

ईशा कलूड़ा चौहान ने रंगोली के माध्यम से अष्टांग योग का परिचय दिया

ऋषिकेश,24 जून। खदरी निवासी ईशा कलूड़ा चौहान ने रंगोली के माध्यम से अष्टांग योग का परिचय दिया है योग के महत्व हमारी भारतीय संस्कृति एवं प्राचीन स्वरूप शास्त्रों से तो है ही है और साथ ही आज के समय में यह आवश्यक करण बन चुका है ।
ईशा की यह रचना रंगोली के रूप में समाज में योग के प्रति जागरूकता के साथ-साथ पर्यावरण प्रेम का भी संदेश देती है। योग हमें जीवन में स्वस्थ संयमित नियम एवं आचार विचार शुद्ध रखने का संदेश देती है साथ ही प्रकृति में रहकर प्रकृति प्रेमी होना भी सिखाती है।
ईशा ने अपनी इस कला में योग के साथ प्रकृति के प्रति उदारता रखने का संदेश दिया है ।
रंगोली से उन्होंने प्राकृतिक रंगों का प्रयोग करते हुए प्रकृति विरोधी रंगों का प्रयोग से सभी को सुरक्षित रहने व रखने का संदेश भी दिया है । सोशल मीडिया में ईशा किया रंगोली बहुत पसंद की जा रही है।
रंगोली के यह रंग आटे ,हल्दी ,चावल , फूलों आदि से बनाए गई हैं ।
जो कि पूर्ण रूप से प्राकृतिक है ।योग करे निरोग रहे , प्राकृतिक एवं प्रकृति प्रेमी रहे।
उत्तराखण्ड प्रान्त पर्यावरण प्रमुख पर्यावरणविद विनोद जुगलान विप्र ने ईशा को पर्यावरण के प्रति कार्य करते रहने को प्रोत्साहित किया है और उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को पर्यावरण संरक्षण-संवर्धन के लिए बढ़ चढ़कर आगे आना चाहिए।क्योंकि प्रकृति संरक्षित रहेगी तो हमारी आने वाली पीढियां भी सुरक्षित होंगी।

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