उत्तराखंड

श्री भरत मन्दिर के महन्त अशोक प्रपन्नाचार्य महाराज का शरीर शान्त हुआ

अशोक प्रपन्नाचार्य महाराज का 10 फ़रवरी 1942 को ऋषिकेश में श्री ज्योति प्रसाद शर्मा के परिवार में हुआ

ऋषिकेश, 08 जुलाई। प्रात: 7:30 बजे श्री भरत मन्दिर के महन्त श्रद्धेय अशोक प्रपन्नाचार्य महाराज का शरीर शान्त हुआ, महन्त का जन्म दिनॉंक 10 फ़रवरी 1942 को ऋषिकेश में श्री ज्योति प्रसाद शर्मा के परिवार में हुआ, श्री अशोक प्रपन्नाचार्य जी सबसे बड़े पुत्र थे उनसे बड़ी एक बहन व छोटी बहन व छोटे भाई हर्षवर्धन शर्मा हैं, उनके दादा पुराण प्रसिद्ध श्री भरत मन्दिर के गद्दी नसीन मंहन्त स्व० परशुराम महाराज जोकि नगर पालिका परिषद ऋषिकेश के प्रथम अध्यक्ष भी रहे उनके पश्चात
स्व०अशोक प्रपन्नाचार्य जी श्री भरत मन्दिर ऋषिकेश की गद्दी में वर्ष 1956 में शुषोभित हुऐ, इसके साथ ही श्री भरत मन्दिर द्वारा संचालित शिक्षण संस्थाओं श्री भरत मन्दिर इण्टर कॉलेज,श्री भरत मन्दिर संस्कृत महाविद्यालय, ज्योति विशेष विद्यालय के साथ ही उत्तराखंड एवं अन्य स्थानों की धार्मिक एवं शैक्षणिक संस्थाओं के संचालन व संवर्द्धन में सराहनीय भूमिका रही श्री भरत मंदिर एजुकेशन सोसाइटी व शिक्षण संस्थाओं के आप संचालक मंडल के अध्यक्ष पद पर सुशोभित रहे ।
पंडित ललित मोहन शर्मा राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, शान्तिप्रपन्न शर्मा राजकीय चिकित्सालय ऋषिकेश व कई अन्य संस्थाओं को वृहत्तर भूखंड प्रदान कर क्षेत्र के युवाओं के लिए उच्च शिक्षा प्रवेश द्वार खोले व नगरीय क्षेत्र के साथ गढ़वाल के नागरिकों की स्वास्थ्य सुविधाओं के संवर्धन में महत्वपूर्ण योगदान रहा।
वर्ष 1962 के भारत चीन युद्ध में भारतीय सेनाओं को शिविर कैम्प संचालित करने के लिये स्व० मंहन्त अशोक प्रपन्नाचार्य ने श्री भरत मन्दिर इण्टर कॉलेज के विशाल प्रांगढ को प्रदान करने के साथ ही रायवाला में सेना को छावनी बनाने का सुझाव प्रदान किया था।
स्वाधीनता संग्राम में भी श्री भरत मंदिर परिवार का महत्वपूर्ण योगदान रहा महंत श्री अशोक प्रपन्नाचार्य के चाचा स्वर्गीय श्री शान्ति प्रपन्न शर्मा कई वर्षों तक उत्तर प्रदेश विधानसभा में क्षेत्र से कई बार विधायक व उत्तर प्रदेश सरकार में परिवहन, उद्योग व ऊर्जा मंत्री पद पर रहे व ऋषिकेश में आईडीपीएल की स्थापना का सुझाव तत्कालीन केन्द्र सरकार को उनके द्वारा ही प्रदान किया गया था ।
स्वर्गीय मंहन्त अशोक प्रपन्न शर्मा छोटे भाई श्री हर्षवर्धन शर्मा क्षेत्र के सार्वजनिक,सामाजिक सेवा जीवन के साथ शिक्षण संस्थाओं के संचालन में प्रबंधकीय व्यवस्था देखते हैं ।
उत्तरकाशी भूकंप,केदारनाथ आपदा व कोरोना महामारी में लॉक डाउन के दौरान स्व० मंहन्त जी व उनके परिवार द्वारा राहत कार्यों में बड़े स्तर सहायता प्रदान की ।
स्वर्गीय मंहन्त अपने पीछे भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं आपके दो पुत्र श्री वत्सल शर्मा व श्री वरुण शर्मा हैं वे भी सामाजिक,शिक्षण संस्थाओं व धार्मिक संस्थाओं के संचालन व संवर्धन में सक्रिय हैं ।
स्व० मंहन्तजी विगत कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे उनका अंतिम संस्कार ऋषिकेश चंद्रेश्वर घाट मुक्ति धाम पर अपराह्न 3 बजे सम्पन्न होगा ।

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