उत्तराखंड

कृषि करण के पुनर निर्धारण को दी कृषि मंत्री ने स्वीकृति

प्रदेश सरकार ने जड़ी-बूटी एवं सगन्ध पौधों के कृषिकरण के लिए राज सहायता को प्रदान की स्वीकृति

 

देहरादून, 30 जुलाई। राज्य सरकार द्वारा जड़ी-बूटी एवं संगम पौधों के लिए वशीकरण हेतु राज सहायता का पुनः निर्धारण किस किया गया है जिसकी स्वीकृति कृषि उद्यान व रेशम मंत्री सुबोध उनियाल ने दे दिया योजना के तहत वर्तमान में 28 प्रजातियों को वशीकरण पर अनुदान के लिए सम्मिलित किया गया है

योजना के तहत वर्तमान में 28 प्रजातियों को कृषिकरण पर अनुदान के लिए सम्मिलित किया गया है । इसमें सगन्ध घासें ( लेमनग्रास , सिट्रोनला , पामारोजा , खस आदि ) डेमस्क गुलाब जिरेनियम , कालाजीरा , तेजपात एवं तिमूर , चन्दन , मिन्ट ( Except- जापानी मिन्ट ) जैसी प्रजातियां शामिल हैं व कृषिकरण पर लागत का 50 प्रतिशत के समान राजसहायता का प्राविधान है ।

इस वर्ष से किसानों को दी जाने वाली राज सहायता का पुर्ननिर्धारण कर दिया गया है । अब तक वर्ष 2005 की उत्पादन लागत के अनुसार अनुदान राशि की गणना की जा रही थी । वर्तमान में मैंहगाई एवं कृषिकरण कार्यो की लागत में वृद्धि को मददेनजर रखते हुए राजसहायता के निर्धारित किया गया है । उदाहरण के तौर पर सगन्ध चास प्रजाति में पौध संख्या / नाली रू 0 550 राजसहायता को अब रू 1000 पौध संख्या / नाली एवं डेमस्क गुलाब की खेती में पौध संख्या / नाली 200 का मानक 88 पौध संख्या / नाली कर दिया गया है । इसी तरह गुणवत्ता परीक्षण शुल्क पर 50 छूट का प्राविधान किया गया है । योजनान्तर्गत अधिकाधिक केसानों को लाभान्वित कराये जाने के निर्देश गये हैं । साथ ही पंजीकृत किसान के मध्य प्रतिवर्ष अलग – अलग किसानों को योजना से आच्छादित किया जाना है । अनुदान की अधिकतम सीमा रू 1.00 लाख या 2 हैक्टे 0 भूमि पर पौध की लागत . जो भी न्यून हो , अनुमन्य होगा ।

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