धर्म-कर्म

बूढ़ा केदार मंदिर को मिला भव्य रूप, ग्रामीणों ने की पांचवा धाम घोषित करने की मांग

बूढ़ा केदार मंदिर को मिला भव्य रूप, ग्रामीणों ने की पांचवा धाम घोषित करने की मांग

ऋषिकेश 13 अगस्त। टिहरी जनपद के बूढ़ाकेदार शिव मंदिर प्राचीन एवं प्रचलित है। मंदिर के अंदर विशालकाय पत्थर कि शीला विद्यमान है, जिस पर पांडवों की आकृतियां हैं। यह मंदिर काफी प्राचीन है जिसे अब भव्य रुप दिया गया है।
पूर्व में आवागमन की सुविधा नहीं थी, तो यात्री पहले बूढ़ा केदार के दर्शन करते थे और उसके बाद बाबा केदारनाथ के दर्शन को जाते थे। बूढ़ा केदार की यात्रा के बिना चारधाम यात्रा अधूरी मानी जाती है। श्रावण मास में यहां से पैदल कावड़ यात्रा होती है और इस माह में यहां काफी अत्यधिक संख्या में यात्री दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं। बूढ़ा केदार को पांचवा धाम घोषित करने की लंबे समय से मांग की जा रही है। परन्तु सरकार की अनदेखी के कारण यहां मंदिर जितना प्राचीन है और जितनी मान्यता है, उतना यहां मंदिर प्रचलित नहीं हो पाया।
बूढ़ाकेदार प्राचीन केदार में एक माना जाता है। जिसका वर्णन पुराणों में भी मिलता है। बताया जाता है कि पांडव गोत्र हत्या से मुक्ति के लिए जब इस मार्ग से होते हुए स्वर्गारोहण के लिए जा रहे थे, तब वह बूढ़ाकेदार में रुके थे। यहां पर भगवान शंकर ने उन्हें बूढ़े व्यक्ति के रूप में दर्शन दिए थे। जिससे उन्हें गोत्र हत्या से यही मुक्त हो गई थी। यहां पर भगवान शंकर आदिकाल से वास करते हैं। भगवान शंकर ने पांडवों को यहां पर बूढ़े रूप में दर्शन दिए थे। जिसके बाद इस धाम का नाम पहले वृद्ध केदार और बाद में बूढ़ा केदार हो गया। इस मंदिर की नींव शंकराचार्य ने रखी थी। बूढ़ाकेदार के दर्शन से केदारनाथ जैसा फल मिलता है। भगवान शंकर यहां पर अपने पूरे परिवार सहित पांच पांडव चारधाम के चार चरण एवं अपने साकार रूप एवं निराकार रूप में इस लिंग में विराजमान हैं। आज भी बड़ी संख्या में देश के विभिन्न जगह से यात्री बूढ़ा केदार के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं।

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