उत्तराखंड

मेरा कमरा-मेरे उद्गार विषय पर ऑनलाइन परिचर्चा का हुआ आयोजन

आप बार-बार जहां लौटना चाहते हैं वह आपका अपना कमरा होता है। कमरा आपकी अपनी निजता है, जहां आप अकेले नहीं हैं। यदि आप लेखक हैं तो आपके लिए अपना कमरा महत्वपूर्ण होता है। उक्त विचार प्रबोध उनियाल द्वारा संपादित पुस्तक ‘मेरा कमरा’ पर विभिन्न शहरों से जुड़े वक्ताओं ने व्यक्त किए। आपको बताते चलें कि ‘मेरा कमरा-मेरे उद्गार ‘विषय पर ऑनलाइन परिचर्चा का आयोजन किया गया। जिसमें नागपुर, मेरठ,हल्द्वानी, नैनीताल, देहरादून ,नरेंद्रनगर,टिहरी व विकास नगर आदि शहरों से पुस्तक में समिल्लित साहित्यकारों ने शिरकत की। इस परिचर्चा का संचालन चौधरी चरण सिंह मेरठ विश्वविद्यालय के कला- संकाय अध्यक्ष व हिंदी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर नवीन चंद्र लोहनी ने किया।
मेरा कमरा में उत्तराखंड के वर्तमान व पूर्व की पीढ़ी के चालीस महत्वपूर्ण रचनाकारों के आलेख हैं।
वरिष्ठ साहित्यकार प्रभात उप्रेती ने कहा की लॉकडाउन अवधि में इस पुस्तक का आना एक सुखद उपलब्धि है। पुस्तक में सभी रचनाकार अपने कमरे के बहाने जीवन यात्रा का वर्णन करते हैं।
प्रसिद्ध रंगकर्मी व शायर जहूर आलम ने कहा कि मेरा कमरा पुस्तक अपनी जड़ों की ओर लौटने का संदेश देती है। नई पीढ़ी के लिए यह किताब उपयोगी है।
डॉ सविता मोहन ने कहा कि स्त्री के लिए उसका अपना कमरा एक सौभाग्य होता है, जहां उसके तमाम सपने होते हैं।
कथाकार गंभीर पालनी ने कहा कि इस पुस्तक मेरा कमरा के बहाने अब मुझे मेरा कमरा मिल गया है। यही नहीं उन्होंने शीघ्र ही अपने नए उपन्यास के प्रकाशन के अवसर पर सभी साहित्यिक मित्रों को अपने नए कमरे में आने का निमंत्रण भी दिया।
वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ललित मोहन रयाल ने कहा कि मेरा कमरा में लेखिकाओं ने स्त्री चेतना की भी बात रखी है। बेटियां अपने घर से विदा होकर दूसरे घर में आकर बस जाती हैं जहां वे वहां के पूर्वाधार सीखती है।उन्होंने जगमोहन आज़ाद के कमरे को उनकी करुणा भरी दास्तां कहा।
प्रमोद शाह ने कहा कि मेरा कमरा का प्रकाशन एक अनूठा प्रयास है जिसकी प्रशंसा की जानी चाहिए। शिक्षा अधिकारी व साहित्यकार शिव प्रसाद सेमवाल ने कहा कि मेरा कमरा में अधिकांश रचनाकारों के संदर्भ मार्मिक बन पड़े हैं, ये संघर्ष राह भी दिखाते हैं।
इसके अलावा परिचर्चा में महेश चिटकारिया, मामराज चौहान,डॉ मनोज कुमार,नीलम शर्मा व सरस्वती उनियाल ने भी विचार रखे।

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