शिक्षा

स्वंय तिल तिल जलकर शिक्षा की अलख जगाता है शिक्षक- डॉ राजे सिंह नेगी

ऋषिकेश, 05  अक्टूबर। शिक्षक समाज में उच्च आदर्श स्थापित करने वाला व्यक्तित्व होता है। किसी भी देश या समाज के निर्माण में शिक्षा की अहम् भूमिका होती है।कहा जाए तो शिक्षक ही समाज का आईना होता है।
हिन्दू धर्म में शिक्षक के लिए कहा गया है कि ‘आचार्य देवो भव:’ यानी कि शिक्षक या आचार्य ईश्वर के समान होता है। यह दर्जा एक शिक्षक को उसके द्वारा समाज में दिए गए योगदानों के बदले स्वरूप दिया जाता है। लेकिन तीर्थ नगरी में एक ऐसा शिक्षक भी है जोकि वास्तविक शिक्षक ना होते हुए भी शिक्षक होने का फर्ज बेहद ही संजीदा तरीके से निभा रहा है।विश्व शिक्षक दिवस के मोके पर निशुल्क शिक्षण संस्थान उड़ान के संस्थापक समाजसेवी डॉ राजे सिंह नेगी ने बताया कि शिक्षक का दर्जा समाज में हमेशा से ही पूज्यनीय रहा है। कोई उसे ‘गुरु’ कहता है, कोई ‘शिक्षक’ कहता है, कोई ‘आचार्य’ कहता है, तो कोई ‘अध्यापक’ या ‘टीचर’ कहता है। ये सभी शब्द एक ऐसे व्यक्ति को चित्रित करते हैं, जो सभी को ज्ञान देता है, सिखाता है और जिसका योगदान किसी भी देश या राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करना है।बकौल डा राजे सिंह नेगी के अनुसार उनके पिता एक शिक्षक रहे हैं और वह भली-भांति समझते हैं कि एक शिक्षक किस प्रकार तिल तिल जलकर समाज में शिक्षा की अलख जगाता है।
सही मायनों में कहा जाए तो एक शिक्षक ही अपने विद्यार्थी का जीवन गढ़ता है और शिक्षक ही समाज की आधारशिला है। उड़ान शिक्षण संस्थान के निदेशक डॉ नेगी के अनुसार एक शिक्षक अपने जीवन के अंत तक मार्गदर्शक की भूमिका अदा करता है और समाज को राह दिखाता रहता है, तभी शिक्षक को समाज में उच्च दर्जा दिया जाता है।माता-पिता बच्चे को जन्म देते हैं। उनका स्थान कोई नहीं ले सकता, उनका कर्ज किसी भी रूप में नहीं उतारा जा सकता, लेकिन एक शिक्षक ही है जिसे हमारी भारतीय संस्कृति में माता-पिता के बराबर दर्जा दिया जाता है, क्योंकि शिक्षक ही हमें समाज में रहने योग्य बनाता है इसलिए ही शिक्षक को ‘समाज का शिल्पकार’ कहा जाता है। गुरु या शिक्षक का संबंध केवल विद्यार्थी को शिक्षा देने से ही नहीं होता बल्कि वह अपने विद्यार्थी को हर मोड़ पर राह दिखाता है और उसका हाथ थामने के लिए हमेशा तैयार रहता है। विद्यार्थी के मन में उमड़े हर सवाल का जवाब देता है और विद्यार्थी को सही सुझाव देता है और जीवन में आगे बढ़ने के लिए सदा प्रेरित करता है।
उन्होंने कहा कि सफल जीवन के लिए शिक्षा बहुत उपयोगी है, जो गुरु द्वारा प्रदान की जाती है। विश्व में केवल भारत ही ऐसा देश है, जहां पर कि शिक्षक अपने शिक्षार्थी को ज्ञान देने के साथ-साथ गुणवत्तायुक्त शिक्षा भी देते हैं, जो कि एक विद्यार्थी में उच्च मूल्य स्थापित करने में बहुत उपयोगी है। वह मानते हैं कि आधुनिक युग में शिक्षक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। शिक्षक वह पथ-प्रदर्शक होता है, जो किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाता है। आज के समय में शिक्षा का व्यवसायीकरण और बाजारीकरण हो गया है। शिक्षा का व्यवसायीकरण और बाजारीकरण देश के समक्ष बड़ी चुनौती हैं।

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