
देहरादून। बिधौली-कंडोली क्षेत्र में कॉलेज के छात्र-छात्राओं तक महंगी और इंपोर्टेड शराब पहुंचाने वाले नेटवर्क की एक और कड़ी आबकारी विभाग के हाथ लगी है। बिशनपुर में दादी की टपरी के पास कंडोली-प्रेमनगर क्षेत्र में की गई छापेमारी के दौरान टीम ने किराये के कमरे से 95 बोतल इंपोर्टेड शराब और बडवाइजर बीयर की 28 कैन बरामद कीं। शराब आदित्य कुमार निवासी उत्तर प्रदेश के कमरे और घर के नीचे खड़ी बिना नंबर की टीवीएस जुपिटर स्कूटी से मिली। बरामद बोतलों पर ‘फॉर सेल इन चंडीगढ़ ओनली’ अंकित है। इनमें रेड लेबल और वैलेंटाइन जैसे महंगे ब्रांड भी शामिल हैं।
प्रभारी सहायक आबकारी आयुक्त प्रेरणा बिष्ट के निर्देशन में जनपदीय प्रवर्तन दल देहरादून और आबकारी टीम मसूरी ने यह कार्रवाई की। पूछताछ में आदित्य ने बताया कि शराब गर्वित उर्फ विक्रांत की है और उसने ही बेचने के लिए दी थी। गर्वित फिलहाल जेल में बंद है। आबकारी विभाग के अनुसार, वह बिधौली क्षेत्र में ‘ऑल राउंडर चाचा’ नाम से तीन ढाबे संचालित कर रहा था। पेट्रोलियम कॉलेज के आसपास और हॉस्टल में शराब की डिलीवरी की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद विभाग ने भंडारण की सूचना पर छापा मारा
गर्वित उर्फ विक्रांत की भूमिका सामने आने के बाद आबकारी विभाग ने जांच तेज कर दी थी। इससे पहले 25 अगस्त को दो आरोपितों को गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ और मिले सुरागों के आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश शुरू हुई। इसी मामले में गर्वित की मां को भी अवैध शराब की बिक्री और उसे कब्जे में रखने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।
आबकारी विभाग के मुताबिक, पिछली कार्रवाई के दौरान गर्वित फरार हो गया था। गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने पहले देहरादून जिला न्यायालय में जमानत याचिका दायर की, लेकिन उसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद नैनीताल हाईकोर्ट से भी राहत नहीं मिली। लगातार कार्रवाई और जांच के बीच गर्वित ने सात अक्टूबर को देहरादून के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया। अदालत ने उसे जेल भेज दिया। आठ अक्टूबर को आदित्य के कमरे से शराब की बरामदगी को विभाग इसी नेटवर्क की अगली कड़ी मानकर जांच कर रहा है।
स कार्रवाई में आबकारी निरीक्षक मसूरी दिवाकर चौधरी, आबकारी निरीक्षक प्रवर्तन दल देहरादून जयवीर सिंह, उप आबकारी निरीक्षक उमराव सिंह राठौर, आशीष प्रकाश, अर्जुन सिंह, विजय कोठियाल, हेड कांस्टेबल राकेश नाथ, गोविंद सिंह, हेमंत, नौशाद और रीनू कुमार शामिल रहे।
रेट कार्ड से होम डिलीवरी तक, ऐसे चलता था कथित नेटवर्क
जांच में शराब की बिक्री के लिए व्यवस्थित तरीके से ग्राहकों तक पहुंच बनाने के आरोप सामने आए हैं। शराब की कीमत और उपलब्धता का रेट कार्ड हॉस्टल तथा पीजी में रहने वाले छात्र-छात्राओं तक पहुंचाया जाता था। इसके जरिए ग्राहक शराब के ब्रांड और कीमत की जानकारी लेकर ऑर्डर कर सकते थे। इस तरह कथित नेटवर्क ने शैक्षणिक संस्थानों के आसपास रहने वाले युवाओं को अपने ग्राहकों के रूप में जोड़ रखा था।
वाट्सएप ग्रुप में सेल्फी और लोकेशन से हाजिरी
आबकारी विभाग के अनुसार, गर्वित ने शराब की बिक्री और डिलीवरी के लिए वाट्सऐप ग्रुप बनाया था। इसमें डिलीवरी करने वाले युवाओं को सुबह और शाम सेल्फी तथा लोकेशन साझा कर अपनी उपस्थिति दर्ज करानी पड़ती थी। इस व्यवस्था के जरिये उनके काम पर निगरानी रखी जाती थी।
कमजोर आर्थिक स्थिति वाले छात्रों को पैसे का लालच
विभाग का आरोप है कि गर्वित कॉलेज के आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को रुपये का प्रलोभन देकर शराब की होम डिलीवरी के काम में लगाता था। कुछ युवाओं को डराने-धमकाने के आरोप भी सामने आए हैं। विभाग का दावा है कि इस काम के लिए कुछ युवाओं को हरियाणा से भी लाया गया था।
करीब 10 बिना नंबर की स्कूटी का इस्तेमाल
शराब की डिलीवरी के लिए बिना नंबर वाले दोपहिया वाहनों का इस्तेमाल किए जाने की बात भी सामने आई है। विभाग के मुताबिक, गर्वित ने क्षेत्र में करीब 10 बिना नंबर की स्कूटी सक्रिय की थीं। पिछले दो महीने में आबकारी विभाग गर्वित की चार ऐसी स्कूटी आबकारी अधिनियम की धारा 72 के तहत जब्त कर चुका है। इन वाहनों के जरिये हॉस्टल और पीजी तक शराब पहुंचाई जाती थी।




