उत्तराखंडनेत्रदान

नेत्रदान बनता जा रहा है पारिवारिक परंपरा

ऋषिकेश।नेत्रदान अब धीरे-धीरे समाज में एक पारिवारिक परंपरा का रूप लेता जा रहा है। जिन परिवारों में पूर्व में नेत्रदान किया जा चुका है, वे अपने परिजनों के निधन पर पुनः नेत्रदान कराकर न केवल अपने सामाजिक दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं, बल्कि समाज के लिए प्रेरणास्रोत भी बन रहे हैं।
कहते हैं कि पिता की अर्थी पुत्र के कंधों पर जाती है, किंतु यदि पिता के सामने पुत्र का निधन हो जाए तो वह अत्यंत विषम और पीड़ादायक स्थिति होती है। ऐसी ही कठिन परिस्थिति में पूर्व में शादीलाल धींगडा ने अपने पुत्र राजा धींगडा के निधन पर नेत्रदान कराकर एक मिसाल कायम की थी। वर्तमान में शादीलाल धींगडा के निधन पर उनके परिवारजनों ने भी नेत्रदान कराकर सामाजिक दायित्व का निर्वहन किया।
इसी प्रकार, पूर्व में अपने पिता स्व. मदन मोहन कुकरानी के निधन पर नेत्रदान कराने वाले सचिन कुकरानी ने अपनी माता स्व. भावना कुकरानी के निधन पर भी नेत्रदान कराकर अपने परिवार को नेत्रदाता परिवार के रूप में स्थापित किया।
दोनों ही परिवारों के मामलों में निर्मल आई हॉस्पिटल की नेत्रदान रेस्क्यू टीम द्वारा निवास स्थान पर पहुंचकर कॉर्निया सुरक्षित रूप से प्राप्त किए गए। इस टीम में डॉ. अंशु, डॉ. राणा, डॉ. तुषार एवं मकरेंदू शामिल रहे।
नेत्रदान की इसी कड़ी में प्रेमनगर निवासी स्व. करतार चंद सैनी के निधन पर भी नेत्रदान कराया गया। यह प्रेरणा नेत्रदान महादान हरिद्वार-ऋषिकेश प्रेमनगर इकाई के प्रभारी एवं पंजाबी महासभा के अध्यक्ष अमित भाटिया (सोनू) द्वारा दी गई। इस कार्य में पवन सैनी एवं रमन सैनी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस पुनीत कार्य के लिए लायंस क्लब ऋषिकेश देवभूमि के गोपाल नारंग, अनिल ककड़, संचित अरोड़ा एवं अर्जुन कोहली ने गौरव कुकरानी, अमित धींगडा, जगदीश चिचरा एवं गुलशन ढींगरा को नेत्रदान हेतु साधुवाद दिया।
लायंस क्लब ऋषिकेश देवभूमि के अध्यक्ष राजीव अरोड़ा के अनुसार, क्लब के मिशन द्वारा अब तक कुल 445 नेत्रदान सफलतापूर्वक कराए जा चुके हैं।

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