
ऋषिकेश, 3 मई। नेत्रदान के प्रति समाज में अब नई सोच के साथ क्रांति आ रही है। लोग नेत्रदान के महत्व को समझते हुए आगे आ रहे हैं। हाल ही में देहरादून निवासी यशपाल चावला व सहारनपुर निवासी रविंद्र कुमार जैन के मरणोपरांत परिजनों ने दुख की घड़ी में भी संवेदनशीलता का परिचय देते हुए नेत्रदान का पुनीत कार्य किया।

नेत्रदान कार्यकर्ता व लायंस क्लब ऋषिकेश देवभूमि के चार्टर अध्यक्ष गोपाल नारंग ने बताया कि देहरादून निवासी हृदय रोग से पीड़ित यशपाल चावला के स्वास्थ्य लाभ की जानकारी प्राप्त करने पहुंचे सुंदर मोहन पाहवा को चिकित्सक ने सच्चाई से अवगत कराया। इस पर पाहवा ने परिजनों से नेत्रदान की स्वीकृति प्राप्त कर उन्हें मृत्योपरांत नेत्रदान कराने के लिए प्रेरित किया। अस्पताल प्रशासन ने आई डोनर कार्ड के आधार पर स्वीकृति प्रदान की। श्री पाहवा ने उन्हें अंगदान व नेत्रदान मृत्यु के उपरांत परिवार की सहमति से भी होने की जानकारी दी। चिकित्सक से स्वीकृति मिलने पर उन्होंने नारंग को अवगत कराया।
मृत्योपरांत सूचना मिलने पर नारंग के आग्रह पर हिमालय नेत्र बैंक प्रभारी डॉ. सुकृति उपाध्याय ने नेत्रदान की रेस्क्यू टीम में डॉ. रोहन मेहंदीरता को भेजकर दोनों कॉर्निया सुरक्षित प्राप्त कर लिए।
नेत्रदान की कड़ी में सहारनपुर निवासी रविंद्र कुमार जैन के निधन पर पूर्व में पिता का नेत्रदान करा चुके अनुपम गर्ग ने परिजनों से स्वीकृति प्राप्त कर नारंग से संपर्क किया। नारंग के सहारनपुर में सहयोगी सूरज जैन पारिवारिक कार्य से मुजफ्फरनगर गए हुए थे। उनके आग्रह पर वह अपना कार्य बीच में छोड़कर मृतक के सहारनपुर स्थित निवास पर पहुंचे व नेत्रदान का पुनीत कार्य कराकर पुनः वापस मुजफ्फरनगर गए। नेत्रदान के प्रति उनकी निष्ठा पर सुशील भनोट, गुरदेव सिंह, विशाल मल्होत्रा ने सूरज जैन को साधुवाद दिया।
लायंस क्लब ऋषिकेश देव भूमि के जनसंपर्क अधिकारी मनमोहन भोला ने बताया कि लायंस क्लब ऋषिकेश देवभूमि का यह मिशन का 461वां सफल नेत्रदान प्रयास है। उन्होंने कहा कि नेत्रदाताओं के सहयोग से यह अभियान अविरल चलता रहेगा और अधिक से अधिक लोगों को नई रोशनी मिल सकेगी।







