
ऋषिकेश। नगर निगम में प्रशासनिक ढांचे की बड़ी खामी सामने आई है। अधिशासी अभियंता और सहायक अभियंता जैसे अहम तकनीकी पद पिछले दो माह से खाली पड़े हैं, जिससे शहर के विकास और निर्माण कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।
सहायक नगर आयुक्त चंद्रकांत भट्ट ने स्वीकार किया कि निगम में दोनों पद लंबे समय से रिक्त हैं। इन पदों पर नियुक्ति न होने के कारण निर्माण कार्यों की स्वीकृति, भुगतान, टेंडर प्रक्रिया और तकनीकी परीक्षण जैसे जरूरी काम अटक गए हैं।
विकास योजनाओं पर ब्रेक
शहर में चल रही सड़क मरम्मत, नाली निर्माण, स्ट्रीट लाइट व्यवस्था और स्वच्छता से जुड़े कई प्रस्ताव इंजीनियरिंग अनुमोदन के अभाव में लंबित हैं। ठेकेदारों के भुगतान रुके होने से काम की रफ्तार भी सुस्त पड़ गई है।
जिम्मेदारी किसकी?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पर्यटन नगरी में इस तरह की लापरवाही समझ से परे है। सवाल उठ रहे हैं कि जब दो महीने से पद खाली हैं तो वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई? क्या शासन स्तर पर तैनाती को लेकर उदासीनता बरती जा रही है?
जवाबदेही तय हो
विशेषज्ञों का मानना है कि अधिशासी अभियंता और सहायक अभियंता जैसे पद केवल औपचारिक नहीं, बल्कि नगर विकास की रीढ़ होते हैं। इनकी अनुपस्थिति से न केवल कार्य प्रभावित होते हैं बल्कि पारदर्शिता और गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े होते हैं।
अब देखना यह है कि प्रशासन कब तक इन पदों पर नियुक्ति करता है और शहर के अटके विकास कार्यों को रफ्तार मिलती है। फिलहाल जनता को इंतजार है—और सवाल भी।







