उत्तराखंडभ्रष्टाचार

*शासन ने खनन निदेशक पैट्रिक को सेवानिवृत्ति से पहले किया निलंबित*

शासकीय गोपनीयता भंग करने व पद के दुरूपयोग का लगा आरोप

सरकारी संविदा कर्मियों को अपने पारिवारिक व निजी कार्यों लगाया गया था
लम्बी चौड़ी चार्ज सीट के साथ किया गया निलंबित

देहरादून। उत्तराखंड शासन ने बड़ा फैसला लेते हुए भूतत्व एवं खनिकर्म निदेशक एसएल पैट्रिक को ससपेंड कर दिया है। पैट्रिक आने वाले जून माह में अपने पद से सेवानिवृत्त होने वाले थे। शासन ने निदेशक के खिलाफ एक लंबी चौड़ी चार्जशीट जारी करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया है।
शासन ने जारी निलम्बन आदेश में आरोप लगाया गया है कि डायरेक्टर पैट्रिक ने राजकीय कार्यों की गोपनीयता भंग की है। साथ ही सरकारी संविदा कर्मियों को अपने पारिवारिक व निजी कार्यों में उपयोग किया जा रहा था। सरकारी वाहनों के दुरुपयोग को लेकर भी चार्जशीट में जिक्र किया गया है। इसके अतिरिक्त निजी कारोबारी ओम प्रकाश तिवारी से लेनदेन व प्रलोभन के वशीभूत होकर सरकारी कार्यों व गोपनीयता को भंग करने व पद के दुरुपयोग का गंभीर आरोप भी इस चार्जशीट में वर्णित है। यही नहीं निदेशक द्वारा निजी स्थान पर निजी व्यक्ति के साथ भेंट वार्ता करना व उसे लाभ दिए जाने को लेकर भी निलम्बन आदेश में जिक्र करते हुए इसे शासन ने गंभीर अनियमितता करार दिया है। इसके अतितिक्त ई निविदा व ई नीलामी में भी निदेशक द्वारा लचर प्रणाली अपनानाने को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
शासन ने भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग में निदेशक के पद पर कार्यरत एसएल पैट्रिक पर एक निजी व्यक्ति ओम प्रकाश तिवारी ने शासकीय कार्य के लिए लेन-देन व प्रलोभन के गंभीर आरोप लगाये गये हैं, जिसका पैट्रिक से चैट के माध्यम से प्रतिउत्तर में किसी प्रकार का कोई खंडन अथवा विरोध नहीं किया। व्हाट्सप चैट से पैट्रिक की एक निजी व्यक्ति से मिली भगत, कर शासकीय गोपनीयता भंग करने तथा पद का अनावश्यक दुरूपयोग किया जाना पाया गया है, जबकि एसएलपैट्रिक, जो विभाग के निदेशक के रूप में अपर विभागाध्यक्ष के पदीय कर्तव्यों का निर्वहन कर रहें हैं। पैट्रिक से यह भी अपेक्षा थी कि विभाग की नीति व नियमों के विपरीत जाकर किसी निजी व्यक्ति से व्यक्तिगत भेटवार्ता करने, उसके निजी स्थान पर निदेशक के रूप में जाकर उसे लाभ दिये जाने की नियत से बात करने, किसी निजी व्यक्ति के साथ सरकारी तंत्र को लेकर दुरभि-संधि करने, सांठ-गांठ करने, अपने अधिकारों का दुरुपयोग कर अनुचित लाभ पहुंचाये जाने का कृत्य उन्होंने नहीं किया। परन्तु पदीय कर्तव्यों-दायित्वों के विपरीत जाकर उन्होंने कार्य किया गया कृत्य अत्यंत गंभीर प्रकृति का होने के साथ-साथ विभाग व सरकार की छवि धूमिल करने की श्रेणी का है।

भूतत्व एवं खनिकर्म निदेशालय स्तर पर ई-निविदा सह ई-नीलामी एंव अन्य महत्वपूर्ण प्रकृति के आम जनमानस से जुड़े कतिपय प्रकरणों में विभागीय निदेशक एसएल पैट्रिक की लचर कार्य प्रणाली, उदासीन रवैया एवं सरकारी कार्यों को ससमय निष्पादित न किये जाने की प्रवृत्ति के कारण ऐसे प्रकरणों में निर्गत किये जाने वाले आशय पत्रों से सम्बन्धित पत्रावलियां काफी समय से निदेशालय स्तर पर ही अनावश्यक रूप से लम्बित हैं, जिसके फलस्वरूप स्वीकृत होने वाले खनन पट्टों की स्वीकृति में विलम्ब होने से अपेक्षित राजस्व प्राप्ति किया जाना सम्भव नहीं हो पाया है। राजस्व प्राप्ति को बढ़ाये जाने के स्थान पर पैट्रिक ने अपर विभागाध्यक्ष के रूप में दिये गये दायित्वों का निर्वहन सही प्रकार से न किये जाने का गंभीर कृत्य परिलक्षित हुआ है।
पैट्रिक ने अपने पदीय कर्तव्यों एवं अधिकारों का दुरूपयोग कर विभागीय शासकीय वाहनों को अपने निजी कार्यों को संपादित करने व पारिवारिक सदस्यों के उपयोग के लिए प्रयुक्त किये जाने के गंभीर कृत्य परिलक्षित हुये हैं। इसके अतिरिक्त निदेशालय में तैनात चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों सरकारी व आउटसोर्सिंग के माध्यम से नियुक्त को भी पैट्रिक ने अपने घरेलू कार्यों में लगाये जाने के तथ्य प्रकाश में आयें हैं, जो शासकीय कृत्यों व पद के दुरूपयोग की श्रेणी में आते हैं। इन गंभीर आरोपों के सिद्ध होने की स्थिति में पैट्रिक के विरूद्ध उत्तराखण्ड सरकारी सेवक नियमावली 2003 समय-समय पर यथासंशोधित के सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दीर्घ शास्ति प्रदान की जा सकती है।

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