
देहरादून। धामी सरकार ने अब अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक 2025 लागू करने की तैयारी में है। इसके सभी औपचारिकताओं को पूरा करते उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन भी कर दिया गया है। उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का अध्यक्ष प्रो. सुरजीत सिंह गांधी (सेवानिवृत) बीएसएम पीजी कॉलेज रुड़की को बनाया गया है।
दरअसल, धामी सरकार ने उत्तराखंड मदरसा बोर्ड को भंग करने और प्रदेश में संचालित सभी मदरसों को एक अंब्रेला के नीचे लाने के लिए अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक 2025 बनाया था। अगस्त 2025 को विधानसभा सदन की कार्यवाही के दौरान अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक 2025 को पारित किया गया, जिसे बाद में राज्यपाल के पास भेजा गया था। 6 अक्टूबर 2025 को ही लोक भवन (राजभवन) से इस विधेयक को मंजूरी मिल गई थी। वहीं अब उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया गया।
ऐसे में अब जब उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण बोर्ड का गठन हो गया है, लिहाजा 1 जुलाई 2026 से मदरसा बोर्ड पूरी तरह से समाप्त हो जाएगा। इस विधेयक में अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों (मदरसों सहित) को मुख्यधारा की शिक्षा प्रणाली से जोड़ने के लिए लाया गया है। धामी सरकार के इस निर्णय के बाद उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जहां मदरसा बोर्ड 30 जून 2026 को समाप्त होने जा रहा है। इसके बाद सभी मदरसों को उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता और उत्तराखंड विद्यालय शिक्षा बोर्ड से संबद्धता लेनी होगी। साथ ही एक जुलाई 2026 से राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढांचा लागू हो जाएगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि शिक्षा में सुधार का विधेयक पिछले साल अगस्त महीने में विधानसभा में पारित किया गया था। ऐसे में अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक, 2025 की सभी औपचारिकताएं पूरी हो गई है। लिहाजा, सरकार ने इस विधेयक को धरातल पर उतरने के लिए अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन भी कर दिया है। इस विधायक के पीछे सबसे बड़ी बात है कि अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चे भी राष्ट्र की मुख्यधारा से जुड़े, आधुनिक शिक्षा ग्रहण करें। उनको भी शिक्षा का अधिकार मिले और संस्कार युक्त शिक्षा मिले। ताकि वो देश और समाज के काम आ सके और राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दे सके।
सीएम धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मंत्र और संकल्प है कि सबको शिक्षा का अधिकार मिलना चाहिए, जिसके तहत शिक्षा में सुधार का कानून उत्तराखंड सरकार लेकर के आई है। हालांकि देवभूमि उत्तराखंड से इसकी शुरुआत हो गई है। ऐसे में अल्पसंख्यक समाज के सभी बच्चों को आगे आने का अवसर मिलना चाहिए। साथ ही सीएम ने कहा कि अन्य राज्यों को भी इसका लाभ लेना चाहिए।
उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग की उपाध्यक्ष फरजाना बेगम ने कहा कि सरकार के इस निर्णय से अल्पसंख्यक बच्चों को काफी फायदा मिलेगा। फरजाना बेगम का कहना है कि पहले जो बच्चे आगे बढ़ने से रह जाते थे, अब वो डॉक्टर, डीएम, एसएसपी समेत हर विभाग में जा सकते थे। राज्य सरकार ने जो काम किया है, वो अल्पसंख्यक बच्चों के भविष्य के लिए एक मिसाल है। अब अल्पसंख्यक बच्चे भी अच्छे पदों पर काम कर सकेंगे। साथ ही कहा कि राज्य सरकार ने इसी तरह प्रदेश में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करके समानता का अधिकार दिया है।







