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हिम्स जौलीग्रांट में पीआईसीसी कैथेटर कैनुलेशन पर कार्यशाला आयोजित

विशेषज्ञों ने चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ को दी उन्नत तकनीक एवं मरीजों की सुरक्षित देखभाल का प्रशिक्षण

डोईवाला। हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (हिम्स) जौलीग्रांट के क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग द्वारा इंडियन सोसाइटी ऑफ क्रिटिकल केयर मेडिसिन (आईएससीसीएम) की देहरादून शाखा एवं टेलीफ्लेक्स के सहयोग से पेरिफेरली इंसर्टेड सेंट्रल कैथेटर (पीआईसीसी) कैनुलेशन पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य चिकित्सकों एवं नर्सिंग स्टाफ को पीआईसीसी तकनीक की व्यावहारिक जानकारी और कौशल प्रदान करना रहा।

बीसी रॉय सभागार में आयोजित कार्यशाला का शुभारंभ हिम्स के डीन डॉ. ए. शरीफ ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि कौशल आधारित इस तरह की कार्यशालाएं चिकित्सा क्षेत्र में कार्यरत विशेषज्ञों को नवीनतम तकनीकों से अपडेट रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। पीआईसीसी कैथेटर जैसी उन्नत प्रक्रियाओं की बेहतर समझ गंभीर मरीजों के उपचार, संक्रमण नियंत्रण और सुरक्षित देखभाल में सहायक होती है। कार्यक्रम की शुरुआत में क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. सोनिका अग्रवाल ने कार्यशाला की रूपरेखा एवं उद्देश्यों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कार्यशाला में 50 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें कंसल्टेंट चिकित्सक, रेजिडेंट डॉक्टर, नर्स प्रैक्टिशनर और आईसीयू नर्स शामिल रहे।
वैज्ञानिक सत्र के दौरान डॉ. मंदीप सिंह खालसा ने पीआईसीसी लाइन के लिए मरीजों के चयन, इसके लाभ एवं सीमाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। वहीं एम्स ऋषिकेश के एनेस्थीसिया एवं क्रिटिकल केयर विभाग के डॉ. अंकित अग्रवाल ने पीआईसीसी कैथेटर लगाने की तकनीक, बेहतर प्रक्रियाओं और इससे जुड़ी सावधानियों पर प्रकाश डाला। कार्यशाला के अगले सत्र में पीआईसीसी नर्स एवं ट्रेनर प्रियंका ने पीआईसीसी लाइन से संबंधित संभावित जटिलताओं, उनकी रोकथाम एवं प्रबंधन के व्यावहारिक पहलुओं पर प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया। कार्यक्रम में डॉ. सोनिका अग्रवाल, डॉ. सोनू समा, डॉ. मंदीप सिंह खालसा, डॉ. अंकित अग्रवाल सहित अन्य विशेषज्ञ एवं प्रतिभागी उपस्थित रहे।

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