
हरिद्वार। आस्था, भक्ति और शिवभक्ति के रंग में रंगा कांवड़ मेला मंगलवार को सकुशल संपन्न हो गया। 30 जुलाई से शुरू हुए कांवड़ मेले में देश के विभिन्न राज्यों से करीब पांच करोड कांवड़िए तीर्थनगरी पहुंचे। श्रद्धालुओं ने हरकी पैड़ी एवं अन्य गंगा घाटों से गंगाजल भरा और अपने-अपने गंतव्यों की ओर रवाना हुए। 11 अगस्त तक चले इस विशाल धार्मिक आयोजन के दौरान प्रशासन और पुलिस की ओर से सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था को लेकर व्यापक इंतजाम किए गए।
मेले के सकुशल संपन्न होने के बाद जिलाधिकारी मयूर दीक्षित और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर ने हरकी पैड़ी पहुंचकर मां गंगा का पूजन किया। दोनों अधिकारियों ने गंगा स्नान कर विधिवत पूजा-अर्चना की और गंगाजल भरा। इसके बाद कनखल स्थित दक्ष प्रजापति मंदिर पहुंचे, जहां भगवान दक्ष प्रजापति के मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर कांवड़ मेले के शांतिपूर्ण एवं निर्विघ्न संपन्न होने पर आभार व्यक्त किया।
कांवड़ मेले के दौरान हरिद्वार में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन के सामने यातायात एवं भीड़ नियंत्रण बड़ी चुनौती रही। इसके बावजूद अधिकारियों की लगातार निगरानी और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय के चलते मेला शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया गया। प्रमुख चौराहों, गंगा घाटों, कांवड़ मार्गों और संवेदनशील स्थानों पर पुलिस बल की तैनाती के साथ ही यातायात व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया। मेले के दौरान प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों ने लगातार स्थलीय निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। कांवड़ियों की सुविधा के लिए पेयजल, चिकित्सा, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था और यातायात प्रबंधन सहित विभिन्न व्यवस्थाओं पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों और कर्मचारियों की टीमें लगातार ड्यूटी पर तैनात रहीं।
कांवड़ मेले के शांतिपूर्ण समापन पर जिलाधिकारी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ ही विभिन्न विभागों, स्वयंसेवी संगठनों, स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों के सहयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि इतने बड़े धार्मिक आयोजन को सकुशल संपन्न कराने में सभी की भूमिका महत्वपूर्ण रही।
अधिकारियों ने कांवड़ियों के अनुशासन और सहयोग की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा देश की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान करते हुए उनकी सुरक्षा और सुविधा को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी गई। गंगाजल लेकर लौटते कांवड़ियों के जयकारों से हरिद्वार गूंजता रहा। प्रशासन और पुलिस के लिए भी 12 दिनों तक चले इस विशाल आयोजन का शांतिपूर्ण समापन बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।







