आस्थाउत्तराखंड

एसआरएचयू में रामलीला के पांचवें दिन हुआ भावुक भरत मिलाप, गूंजा ‘भरत जैसा भाई हो’ का जयघोष

ननिहाल से लौटे भरत-शत्रुघ्न, पिता के देहांत और राम वनवास का समाचार सुनकर हुए दुखी

डोईवाला। हिमालयन रिक्रिएशनल एंड वेलफेयर ट्रस्ट की ओर से स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय, जौलीग्रांट के सेंट्रल पार्क में चल रहे रामलीला महोत्सव के पांचवें दिन भरत-शत्रुघ्न आगमन, भरत मिलाप, शूर्पणखा नासिका छेदन, खर-दूषण वध और रावण दरबार की लीलाओं का भव्य मंचन किया गया।

मंचन की शुरुआत ननिहाल से भरत-शत्रुघ्न की अयोध्या वापसी से हुई। अयोध्या में प्रवेश करते ही जब भरत को पता चला कि पिता महाराज दशरथ का स्वर्गवास हो गया है और बड़े भाई श्रीराम 14 वर्ष के वनवास पर चले गए हैं, तो वे फूट-फूट कर रो पड़े। उन्होंने माता कैकेयी को धिक्कारा और कहा कि जिस राजगद्दी के लिए मेरे प्रभु को वन भेजा गया, वह गद्दी मुझे नहीं चाहिए। शत्रुघ्न ने भी मंथरा को फटकार लगाई।
इसके बाद भरत शत्रुघ्न, गुरु वशिष्ठ और अयोध्या की प्रजा के साथ श्रीराम को मनाने चित्रकूट के लिए निकल पड़े। चित्रकूट में जब श्रीराम ने भरत को आते देखा तो दौड़कर गले लगा लिया। दोनों भाइयों का मिलन देखकर पूरा पंडाल भावुक हो उठा। भरत ने राम की चरण पादुका सिर पर रखकर अयोध्या का राज्य संचालन करने का संकल्प लिया।
इसके बाद पंचवटी में शूर्पणखा का प्रसंग दिखाया गया। सुंदर रूप बनाकर आई शूर्पणखा ने राम-लक्ष्मण से प्रणय निवेदन किया, अस्वीकार होने पर सीता पर झपटी। तब लक्ष्मण ने उसके नाक-कान काट दिए। क्रोधित शूर्पणखा अपने भाई खर-दूषण के पास पहुंची। खर-दूषण ने अपनी विशाल सेना लेकर आक्रमण किया, लेकिन प्रभु श्रीराम ने अकेले ही उनका वध कर दिया। अंत में रावण दरबार का मंचन हुआ, जहां शूर्पणखा ने रावण को सीता हरण के लिए उकसाया।
रामलीला के छठे दिन 16 अक्टूबर को बूढ़ा मारीच प्रसंग, साधु वेश में रावण, सीता हरण, शबरी भक्ति, हनुमान अवतरण और सुग्रीव दरबार का मंचन किया जाएगा।

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