उत्तराखंडन्यायालय

मधुमिता हत्याकांडः अब शूटर संतोष राय की रिहाई का आदेश

अमरमणि दंपती के बाद अब शूटर की रिहाई का रास्ता साफ

23 साल पुराने चर्चित हत्याकांड में उम्रकैद के तीन दोषियों की समयपूर्व रिहाई
हाईकोर्ट उत्तराखण्ड ने दिए रिहाई के आदेश

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति रविंद्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने उम्रकैद की सजा काट रहे कैदियों की समयपूर्व रिहाई से जुड़े मामले में सुनवाई करते हुए संतोष कुमार राय समेत तीन कैदियों की रिहाई के आदेश दिए हैं। अदालत ने निर्देश दिया कि संबंधित दस्तावेज जेल प्रशासन को प्राप्त होते ही रिहाई की प्रक्रिया पूरी की जाए।
यह मामला राज्य सरकार की समयपूर्व रिहाई नीति के क्रियान्वयन से जुड़ा है। अदालत में उन कैदियों की पात्रता का मामला उठा था, जो 14 वर्ष या उससे अधिक समय जेल में बिता चुके हैं। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से समयपूर्व रिहाई के पात्र कैदियों की नई सूची पेश की गई। सरकार ने अदालत को बताया कि रिहाई के लिए गठित समिति की जुलाई और सितंबर में बैठकें हो चुकी हैं तथा पात्र कैदियों को चरणबद्ध तरीके से रिहा किया जा रहा है।
संतोष राय वर्ष 2003 में मधुमिता शुक्ला हत्याकांड के बाद से जेल में बंद है। वर्ष 2007 में देहरादून की अदालत ने उसे हत्या का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। बाद में उत्तराखंड हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी सजा को बरकरार रखा। संतोष वर्तमान में सितारगंज जेल में बंद है। वर्ष 2024 में उसे अपने बीमार पिता के इलाज के लिए तीन माह की अंतरिम जमानत भी मिली थी।
मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी और उनकी पत्नी मधुमणि को भी उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। उत्तर प्रदेश कारागार प्रशासन ने अगस्त 2023 में 2018 की रिमिशन नीति के तहत दोनों की समयपूर्व रिहाई का आदेश जारी किया था। उस समय अमरमणि की उम्र 66 और मधुमणि की 61 वर्ष थी। दोनों ने 16 वर्ष से अधिक की वास्तविक सजा काट ली थी। उम्र और जेल में अच्छे आचरण को रिहाई का आधार बनाया गया था।
मधुमिता की बहन निधि शुक्ला ने अमरमणि और मधुमणि की रिहाई को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। शीर्ष अदालत ने अगस्त 2023 में रिहाई पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। बाद में 25 मार्च 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी चुनौती वाली याचिका खारिज कर दी और संबंधित हाईकोर्ट जाने का विकल्प दिया। इस तरह अमरमणि दंपती पहले ही जेल से बाहर आ चुके हैं। गौरतलब है कि 9 मई 2003 को लखनऊ में कवयित्री मधुमिता शुक्ला की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस समय वह गर्भवती थीं। सीबीआई ने मामले की जांच की थी।
24 अक्टूबर 2007 को देहरादून की अदालत ने अमरमणि त्रिपाठी, मधुमणि त्रिपाठी, रोहित चतुर्वेदी और संतोष कुमार राय को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी दोषसिद्धि को बरकरार रखा था।

23 साल पहले हुई थी कवयित्री मधुमिता शुक्ला की हत्या

कवयित्री मधुमिता शुक्ला हत्याकांड एक बार फिर चर्चा में है। करीब 23 साल पहले हुए इस हत्याकांड में उम्रकैद की सजा पाए पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी और उनकी पत्नी मधुमणि त्रिपाठी अगस्त 2023 में ही जेल से बाहर आ चुके हैं। अब इस मामले के शूटर संतोष कुमार राय की समयपूर्व रिहाई का रास्ता भी साफ हो गया है। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने 30 अक्टूबर को संतोष राय समेत तीन कैदियों की रिहाई के संबंध में आदेश जारी किए। राज्य सरकार की मंजूरी के बाद अब राज्यपाल की स्वीकृति और निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने पर संतोष की रिहाई हो सकेगी। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर इस बहुचर्चित हत्याकांड, दोषियों को मिली सजा और समयपूर्व रिहाई की व्यवस्था को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

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