
उत्तरकाशी। प्रशासन में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब आंदोलनकारियों ने जल समाधि का फैसला लिया। जिसके बाद मान मनौव्वल का दौर चलता रहा।एक माह से तांबाखानी से नगर का कूड़ा हटाने की मांग को लेकर धरने पर बैठे आंदोलनकारियों का सब्र का बांध टूट पड़ा। आंदोलनकारी संतोष सेमवाल ने प्रशासन और पालिका की ओर से सुनवाई न होने गंगा में जलसमाधि लेने का निर्णय लिया। जिसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंच कर आंदोलनकारियों को रोक दिया। आंदोलनकारियों ने कहा कि जब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाता, तब तक वह आंदोलन जारी रखेंगे।
गौर हो कि उत्तरकाशी तांबाखानी में कूड़ा लोगों के लिए सिरदर्द बन गया है। कूड़े के निस्तारण की मांग कर रहे आंदोलनकारियों ने शासन प्रशासन और पालिका के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उसके बाद संतोष सेमवाल पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत जलसमाधि लेने के लिए अपने साथियों विष्णुपाल रावत, गोपीनाथ रावत आदि के साथ रवाना हुए। साईं मंदिर के समीप पहुंचते हुए पुलिस ने उन्हें रोक दिया और पालिका से वार्ता करने की बात कही। लेकिन आंदोलनकारी नहीं माने और उनकी पुलिस की उनके साथ नोकझोंक भी हुई। इस दौरान आंदोलनकारी भावुक हो उठे। पुलिस ने आंदोलकारियों को मणिकर्णिका घाट से पहले रोक कर पालिका प्रशासन को बातचीत के बुलाया।
उन्होंने कहा कि लंबे समय से वह कूड़े का निस्तारण और तांबाखानी से हटाने की मांग कर रहे हैं। लेकिन पालिका प्रशासन उनकी मांगों की अनदेखी कर रहा है, जिसके लिए उनको यह निर्णय लेना पड़ा। कहा कि जब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाता, तब तक वह आंदोलन जारी रखेंगे। नगरपालिका अध्यक्ष भूपेंद्र चौहान मौके पर पहुंचे, उन्होंने आश्वासन दिया कि मंगलवार को पूरा कूड़ा हटाने के लिए ईओ आंदोलनकारियों को एक माह के समय के भीतर हटाने के लिए लिखित में देंगे। उन्होंने कहा कि कूड़ा हटाने का कार्य चल रहा है। दस साल का कूड़ा हटाने में समय लगता है। उसके बाद आंदोलनकारियों ने जल समाधि का कार्यक्रम निरस्त कर धरनास्थल पर लौट आए। उन्होंने कहा कि मांगों पर गौर नहीं हुआ तो वो उग्र आंदोलन करने को विवश होंगे।




