
चमोली। चतुर्थ केदार श्री रुद्रनाथ जी के कपाट 18 मई को दोपहर 12 बजकर 57 मिनट पर विधि विधान वैदिक परंपरा के साथ आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। वसंत पंचमी पर गोपीनाथ मंदिर में पारंपरिक पूजा के साथ भगवान रुद्रनाथ जी के कपाट खुलने की तिथि घोषित की गई।
शुक्रवार को वसंत पंचमी के पावन पर्व पर भगवान रुद्रनाथ जी के शीतकालीन गद्दी स्थल गोपीनाथ मंदिर में ब्राह्मणों ने हक हकूकधारियों की मौजूदगी में पंचांग गणना के आधार पर तिथि की घोषणा की। बता दें कि उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित पंचम केदार में से एक चतुर्थ केदार रुद्रनाथ में भगवान शिव के मुख रूप की पूजा होती है। यहां भगवान अपने एकानन स्वरूप में विराजमान रहते हैं। इसलिए भगवान शिव को यहां एकानन भोलेनाथ के नाम से भी जाना जाता है।
लगभग 18 किलोमीटर की कठिन दूरी को तयकर भक्त रुद्रनाथ पहुंचते हैं। रुद्रनाथ पहुंचने के लिए गोपेश्वर के मंडल सगर गांव व जोतिर्मठ के उर्गम और डुमुक होते हुए भी पैदल मार्ग से भगवान रुद्रनाथ के धाम पहुंचा जा सकता है।
कपाट खुलने से पूर्व 15 व 16 मई तक भगवान रुद्रनाथ के उत्सव विग्रह स्वरूप के दर्शन गोपीनाथ मंदिर गोपेश्वर परिसर में भक्त कर पाएंगे। 17 मई को भगवान रुद्रनाथ जी की डोली रुद्रनाथ के लिए प्रस्थान करेगी और 18 मई को पूर्ण विधि विधान के साथ दोपहर 12 बजकर 57 मिनट पर भगवान रुद्रनाथ जी के कपाट ग्रीष्मकाल के लिए भक्तों के दर्शनार्थ खोल दिये जाएंगे।
पौराणिक परंपराओं के अनुसार शीतकाल के दौरान 6 माह के लिए भगवान रुद्रनाथ के कपाट आम श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ बंद कर दिए जाते हैं और उसके बाद भगवान की उत्सव डोली उनकी शीतकालीन गद्दी स्थल गोपीनाथ मंदिर में विराजमान रहती है। 6 माह तक भगवान रुद्रनाथ की नित्य पूजा अर्चना गोपीनाथ मंदिर में होती है। जो श्रद्धालु रुद्रनाथ तक नहीं पहुंच पाते हैं, वह भगवान रुद्रनाथ के दर्शन गोपीनाथ मंदिर में करते हैं। रुद्रनाथ मंदिर पूरे उत्तर भारत में एकमात्र ऐसा शिव मंदिर है, जहां पर भगवान शिव के मुख दर्शन होते हैं, यह मंदिर उत्तराखंड के पांच केदारों में से चतुर्थ केदार के रूप में प्रसिद्ध है।





