ऋषिकेश: पिता की मृत्यु के समय पुत्र के सर से साया ऊठ जाता है,और माता की मृत्यु के समय बच्चे अपने को असहाय समझते हैं. ऐसे दुख की घड़ी में परिवार के निकटतम द्वारा सामाजिक दायित्व के नाते याद दिलाने पर ही नेत्रदान का पुनीत कार्य होता है।सुभाष खुराना की मृत्यु पर दीपक सोंधी द्वारा उनके पुत्र विकास खुराना को नेत्रदान के लिए प्रेरित करने पर एवं श्रीमती सरोज सहगल की मृत्यु पर परिवार के निकटतम सुरेंद्र मोहन पाहवा द्वारा उनके पुत्र सतीश सहगल को नेत्रदान के लिए सहमत किया गया।
नेत्रदान कार्यकर्ता व लायंस क्लब ऋषिकेश देव भूमि के चार्टर अध्यक्ष गोपाल नारंग के अनुसार गत सप्ताह सुभाष खुराना की मृत्यु पर संचित अरोड़ा की सूचना व श्रीमती सरोज सहगल की मृत्यु पर सुंदर मोहन पाहवा द्वारा जानकारी देने पर ऋषिकेश आई बेंक, एम्स हॉस्पिटल की की टीम मे महीपाल चोहान को सूचित किया गया, जिन्होंने पार्थीव शरीर से कार्निया सुरक्षित प्राप्त कर लिए।
नेत्रदान की कडी मे हनुमन्त पुरम निवासी वरिष्ठ अधिवक्ता भारत भूषण के 76 व्रषीय पिता नारायण सिंह के निधन पर अनिल कक्कड़ के प्रेरणा से नेतदान कराया गया।
कॉर्निया अंध्तत्व को मिटाने के लिए स्वर्गीय राम चरण चावला द्वारा प्रारंभ किये गये मिशन” नेत्रदान महादान हरिद्वार ऋषिकेश “का 442 वां सफल प्रयास है जो अविरल चलता रहेगा।





